Description
- PUBLISHER: वाणी प्रकाशन
- Writter: भोलानाथ तिवारी
- Language : Hindi
- pages: 332
- Format: Hard Copy
- Seller: https://guptabookcentre.co.in/
- Delivery: Through Indian Postal Services
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—भोलानाथ तिवारी की यह पुस्तक हमें ले जाती है उन कालखंडों में, जब भाषा नए रूप-रंग धारण कर रही थी। शिलालेखों, सूफी काव्यों और राजकीय दस्तावेज़ों की गुत्थियों को सुलझाते हुए, लेखक ने दिखाया है कैसे विभिन्न संस्कृतियाँ, साहित्यिक आंदोलनों और सामाजिक बदलावों ने हिंदी के स्वरूप को आकार दिया। हर अध्याय में छिपे हैं रोमांचक प्रसंग: कबीर-रैदास की बिंबात्मक भाषा, रीतिकालीन रचनाओं में निहित भाव, फिर स्वतंत्रता संग्राम में उभरती जागृति की अभिवक्ति्य साथ। पढ़ हीें आधुनिक उपन्यास, नाटक और फिल्मी संवादों में हिंदी के स्वर—कैसे ये शब्दों की दुनिया को और समृद्ध बनाते हैं। व्यापक शोध पर आधारित, पर प्रवाह में बेहद सुरम्य यह इतिहास-चित्रण आपको ले जाएगा पांडुलिपियों से डिजिटल युग तक, विस्तार से दिखाता है कि भाषा कैसे समाज का आईना बनती है। विविध मानचित्र, वर्तनी-सारिणियाँ और उपादानों के साथ हर पाठक अपनी जिज्ञासा के अनुरूप नए पहलू तलाश सकेगा। एक ऐसी रिचार्जिंग खोज, जो न केवल भाषाई विद्यार्थी बल्कि सामजिक-सांस्क अनृतिकेष्वकों को भी रोमांचित कर देगी।
• विकास ऐतिहास: प्राक, अपभ्र से आधुनिक हिंदी तक
• क्षेत्रीयभाषाएँ: ब्र, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी, मगही आदि
• लिपि अवतरण: देवनागरी लिपि का उद्भव और रूपांतरण
• साहित्यिक कालक्रम: भक्ति आंदोलन, रीतिकाल, छायावाद, आधुनिक युग
• भाषाई संरचना: ध्वनिविज्ञान, शब्दरचना, व्याकरणीय परिवर्तन
• संपर्क एवं प्रभाव: संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेज़ी प्रभाव
• मानकीकरण और राष्ट्रभाषा: राजभाषा नीति, भाषा संस्थाएँ
• आधुनिक प्रसार: शिक्षा, मीडिया, डिजिटल माध्यमों में हिंदी

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