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हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास – रामस्वरूप चतुर्वेदी

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हिन्दी साहित्य की बरबस बहती में संवेदना धारा की नब्ज पर लगाने ध्यान वाला यह अनोलंथ, पाठम ग्रकों को साहित्य की हर इकाइयों तक ले जाता है रामस्वरूप चतुर्वेदी ने  कलम से उस परिवर्तनशील भाव-समुद्र का ऐसा विवेचन किया है, जहाँ प्रेम, बिछोह, समाजीय संघर्ष और आत्मअन्वेषण अपनी अलग-अलग लहरे उठाते नजर आते हैं।

प्राचीन पद्य-पारम्परिकता से आधुनिक अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता तक, हर युग की भाषा-भंगिमा-चयन विषय पाठ, और-संवेदना में आए बदलावों का वह सूक्ष्म अवलोकन करता है, जिससे साहित्य सिर्फ शब्द नहीं रहा, बल्कि जीवन के रूप बदलने का दर्पण बन गया। शिल्पगत दृष्टिकोण से भी यह पुस्तक लेखन की तकनीक और भावाभिव्यक्ति के अंतरंग सूत्रों को खोल देती है। अध्यायों में दर्ज ऐतिहासिक प्रसंग, आलोचनात्मक तर्क और मनोवैज्ञानिक विवेचन पाठक को अपने साथ बांधकर रखेंगे। साहित्य-प्रेमी, शोधार्थी और समग्र हिंदी-संस्कृति में रुचि रखने वाला हर पाठक इसे एक नयीि दृष्ट और समृद्धि की चुभन के रूप में महसूस करेगा।

Description

  • PUBLISHER:  लोकभारती  प्रकाशन
  • Writter: रामस्वरूप चतुर्वेदी
  • Language ‏ : Hindi
  • pages: 325
  • Format:  Hard Copy
  • Seller: https://guptabookcentre.co.in/
  • Delivery: Through Indian Postal Services

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