Exam Preparation book
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सामान्य ज्ञान – NCERT सार कक्षा VI-XII सहित ( 3rd Edition ) – महेश कुमार बर्णवाल
Original price was: Rs.499.00.Rs.399.00Current price is: Rs.399.00.Buy Nowक्या आप सामान्य ज्ञान की दुनिया में पुख्ता आधार बनाना चाहते हैं? “सामान्य ज्ञान – NCERT सार कक्षा VI–XII सहित” (तीसरा संस्करण) में महेश कुमार बर्णवाल ने कक्षा VI से XII तक की NCERT पुस्तकें बिन्दुवार, संकलित और सहज भाषा में प्रस्तुत की हैं।
प्रत्येक विषय—इतिहास, भूगोल, विज्ञान, राजनीति, अर्थव्यवस्था—का त्वरित अवलोकन और महत्वपूर्ण तथ्य आपको परीक्षाओं गत कीिमान तैयारियों में एक कदम आगे ले जाएंगे। सरणीबद्ध नोट्स, स्पष्ट चार्ट्स और प्रमुख तिथियों-परिभाषाओं का सहज संदर्भ किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की चुनौती न सेिपटने में आपकी उम्मीदों को आकार देता है।
ये पुस्तक न सिर्फ अवधारणाओं को मज़बूती से समझाती है, बल्कि रुझानों और प्रश्नों के स्वरूप को ध्यान में रखकर आलोचनात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करती है।
अब पूरे NCERT पाठ्यक्रम का सारांश आपके हाथों में—किसी भी परीक्षा के लिए, किसी भी स्तर पर, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
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सार संग्रह – NCERT कक्षा VI-XII सहित ( 2025 Edition ) one liner – महेश कुमार बर्णवाल
Original price was: Rs.540.00.Rs.320.00Current price is: Rs.320.00.Buy Nowसार संग्रह – NCERT VI–XII (2025 संस्करण) महेश कुमार बर्णवाल विश्वसनीय विषयवार संक्षेप जो पाठ्यपुस्तकों की गहराई में झांकते हुए हर महत्वपूर्ण अवधारणा को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। दिन-भर की पढ़ाई के बाद भी समय अभाव हो, तो यह संकलन कम समय में भी आपको परीक्षात्मक दृष्टि से तैयार कर देगा।
• अद्यतन पाठ्यक्रम अनुरूप 2025 संस्करण
• प्रत्येक कक्षा और विषय के लिए स्पष्ट एवं बिंदुवार व्याख्याएं
• महत्वपूर्ण बिंदुओं, सूत्रों व परिभाषाओं का सहज स्मरण
• तेज़ रिवीजन के लिए डायग्राम, चार्ट और आवृत्ति आधारित प्रश्नों का समावेश
• परीक्षाओं में उच्च अंक सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन
जब तैयारी में रफ्तार चाहिए और समझ में गहराई, ‘सार संग्रह’ हर कक्षा के पाठ्यक्रम का अविभाज्य सहयोगी साबित होगा।उदाहरण और प्रश्नोत्तर अनुभाग से सिद्धांतों को व्यवहारिक समझ में परिवर्तित करें और तैयार रहें आत्मविश्वास के साथ मूल्यांकन के लिए। कॉन्सेप्ट क्लियरिटी के लिए आसान भाषा, रंगीन आरेखन और मस्तिष्क-मैप्स आपकी पढ़ाई को बना देंगी और भी प्रभावी। समय की कमी हो या फिर अंतिम घंटों की तैयारी, ‘सार संग्रह’ आपके साथ हर कदम पर योजना-वार मार्गदर्शन करता है।
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सार संग्रह – NCERT कक्षा VI-XII सहित ( 2026 Edition ) One Liner – महेश कुमार बर्णवाल
Original price was: Rs.540.00.Rs.430.00Current price is: Rs.430.00.Buy Nowकक्षा VI से XII तक की प्रत्येक NCERT पाठ्यपुस्तक का सार एक प्रभावशाली पुस्तक में समाहित हो—महेश बार्न द्वारा लिखित NCERT सार संग्रह का 2026 संस्करण यही करता है। प्रत्येक महत्वपूर्ण परिभाषा, सूत्र, ऐतिहासिक तिथि और वैज्ञानिक अवधारणा को समाहित करते हुए, यह घंटों के गहन अध्ययन को मिनटों के आत्मविश्वासपूर्ण पुनरावलोकन में बदल देता है। प्रत्येक पाठ जटिल विषयों को संक्षिप्त अंतर्दृष्टि में बदल देता है, जिससे आप कम समय में अधिक याद रख पाते हैं। चाहे आप बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करना चाहते हों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, या केवल एक मजबूत वैचारिक आधार बनाना चाहते हों, यह पुस्तक आपको प्रदान करती है:
कक्षा VI-XII के लिए अध्यायवार पूर्ण कवरेज
• त्वरित स्मरण के लिए सुव्यवस्थित संक्षिप्त सारांश
• नवीनतम CBSE पाठ्यक्रम के अनुरूप पूर्णतः अद्यतन सामग्री।
स्पष्टता, सटीकता और लेखक के विशेषज्ञ मार्गदर्शन से परिपूर्ण, यह 2026 संस्करण आपकी शैक्षणिक यात्रा में एक अनिवार्य साथी बन जाता है—जो सहज समझ और अटूट विश्वास प्रदान करता है।
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हिंदी आलोचना (अद्यतन एवं परिवर्धित संस्करण ) – विश्वनाथ त्रिपाठी
Original price was: Rs.250.00.Rs.210.00Current price is: Rs.210.00.Buy Nowविश्वनाथ त्रिपाठी का अद्यतन एवं परिवर्धित “हिंदी आलोचना” आपको संस्कृत से लेकर समकाल प्रवीनृत्तियों तक की संपोषित विवेचना में ले जाता है। इस संस्करण में शामिल हैं:
• गौरवमय इतिहासः आरंभिक रस-वैचारिक परंपराओं से लेकर आधुनिक विमर्श तक की निरंतरता और परिवर्तन
• आलोचनात्मक विधियों का विस्तारः संरचनावाद, नवआलोचना, मैक्सवादी, नारीवादी, पोस्टकोलोनियल और पोस्टमॉडर्न दृष्टिकोण
• समृद्ध उदाहरण एवं ग्रंथपरिचर्चा: प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन और आज के प्रमुख आलोचकों की गहरी पड़ताल
• नवीन संवर्धनः डिजिटल मीडिया, फिल्म-समीक्षा, जनसंपर्क और सोशल नेटवर्क के संदर्भ में हिंदी आलोचना के नए आयाम
• सुधारित पुस्तक-सूची एवं संदर्भ सामग्री: शोधार्थियों, शिक्षकों और साहित्यिक उत्साहीों के लिए अनिवार्य मार्गदर्शन
इस संपूर्ण ग्रंथ में त्रिपाठी की स्पष्ट भाषा, सुव्यवस्थित प्रस्तुति और समसामयिक दृष्टिकोण मिलकर हिंदी आलोचना को न सिर्फ समझाने बल्कि उसे नया दृष्टिकोण देने का कार्य करते हैं। चाहे आप पाठ्यक्रम में इस विषय को अपना रहे हों, शोध कर रहे हों या साहित्य स्नेही हों—यह संस्करण आपको आलोचनात्मक पारंपरिकता से मुक्त होकर नए विचारकों के क्षितिज तक ले जाएगा।
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हिंदी भाषा डॉ हरदेव बाहरी
Original price was: Rs.170.00.Rs.145.00Current price is: Rs.145.00.Buy Nowइस पुस्तक में हिंदी भाषा का समृद्ध इतिहास, सहज व्याकरण और विविध प्रयोग एक ही बुनाई में बुना गया है। आदिकालीन लोकगीतों से लेकर आधुनिक साहित्य के उर्दू-फ़ारसी-साहित्यिक रस, सब कुछ ऐसी रोचक व्याख्या में प्रस्तुत है कि पढ़ते ही शब्दों की मिठास और ताकत महसूस होती है। • व्यावहार उदाहरणिकों से समझने में सुगमता • प्राचीन शिलालेखों और समकालनीन लेख का सुंदर समनय • अभ्यास प्रश्न एवं रचनात्मक लेखन गतिविधियाँ हर अध्याय में सामने आता है हिंदी का वह रूप, जो दिल को छू लेने वाले संवाद, साहित्यिक गहराई और आत्मविश्वास से भर देता है। चाहे आप विद्यार्थी हों, शिक्षक या भाषा-प्रेमी—यह पुस्तक आपके शब्दकोश को समृद्ध करने और के भाषा रंग मूलों को आत्मसात् करने का मार्गदर्शक बनेगी।
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हिंदी भाषा का इतिहास – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.395.00.Rs.335.00Current price is: Rs.335.00.Buy Now—भोलानाथ तिवारी की यह पुस्तक हमें ले जाती है उन कालखंडों में, जब भाषा नए रूप-रंग धारण कर रही थी। शिलालेखों, सूफी काव्यों और राजकीय दस्तावेज़ों की गुत्थियों को सुलझाते हुए, लेखक ने दिखाया है कैसे विभिन्न संस्कृतियाँ, साहित्यिक आंदोलनों और सामाजिक बदलावों ने हिंदी के स्वरूप को आकार दिया। हर अध्याय में छिपे हैं रोमांचक प्रसंग: कबीर-रैदास की बिंबात्मक भाषा, रीतिकालीन रचनाओं में निहित भाव, फिर स्वतंत्रता संग्राम में उभरती जागृति की अभिवक्ति्य साथ। पढ़ हीें आधुनिक उपन्यास, नाटक और फिल्मी संवादों में हिंदी के स्वर—कैसे ये शब्दों की दुनिया को और समृद्ध बनाते हैं। व्यापक शोध पर आधारित, पर प्रवाह में बेहद सुरम्य यह इतिहास-चित्रण आपको ले जाएगा पांडुलिपियों से डिजिटल युग तक, विस्तार से दिखाता है कि भाषा कैसे समाज का आईना बनती है। विविध मानचित्र, वर्तनी-सारिणियाँ और उपादानों के साथ हर पाठक अपनी जिज्ञासा के अनुरूप नए पहलू तलाश सकेगा। एक ऐसी रिचार्जिंग खोज, जो न केवल भाषाई विद्यार्थी बल्कि सामजिक-सांस्क अनृतिकेष्वकों को भी रोमांचित कर देगी।
• विकास ऐतिहास: प्राक, अपभ्र से आधुनिक हिंदी तक
• क्षेत्रीयभाषाएँ: ब्र, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी, मगही आदि
• लिपि अवतरण: देवनागरी लिपि का उद्भव और रूपांतरण
• साहित्यिक कालक्रम: भक्ति आंदोलन, रीतिकाल, छायावाद, आधुनिक युग
• भाषाई संरचना: ध्वनिविज्ञान, शब्दरचना, व्याकरणीय परिवर्तन
• संपर्क एवं प्रभाव: संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेज़ी प्रभाव
• मानकीकरण और राष्ट्रभाषा: राजभाषा नीति, भाषा संस्थाएँ
• आधुनिक प्रसार: शिक्षा, मीडिया, डिजिटल माध्यमों में हिंदी
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हिंदी भाषा की संरचना – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.225.00.Rs.195.00Current price is: Rs.195.00.Buy Nowक्या है वह रहस्य जो हिन्दी को उसकी विशिष्ट लय और सौंदर्य देता है? “हिन्दी भाषा की संरचना” में भोलानाथ तिवारी उद्घाटित करते हैं:
• शब्दों के जन्म से लेकर वाक्यों की उड़ान तक: वर्णमाला, स्वर–व्यंजन, मान्यता–निर्धारण और शब्द-रचना का सरल, वैज्ञानिक विवेचन
• वाक्य-योजना की सभी परतें: संधि, समास, उपसर्ग–प्रत्यय, भाव–क्रिया संरचना और व्यक्तित्व की बारीकियां
• रोज़मर्रा के सवालों के व्यावहारिक समाधान: पाठ-उदाहरण, अभ्यास श्रेणियाँ और स्व-परीक्षण
• शिक्षकों, छात्रों और भाषा-प्रेमियों के लिए अमूल्य गाइड: जटिल सिद्धांतों को सहज व मार्मिक बनाता एक ऐसा संसाधन
हिन्दी की गूँज को समझने और आत्मसात करने का यह संपूर्ण मार्गदर्शक, शब्दों के परे एक संस्कृति की उपस्थिति महसूस कराता है।
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हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास – बच्चन सिंह
Original price was: Rs.400.00.Rs.340.00Current price is: Rs.340.00.Buy Now“हिन्दी साहित्य का दूसरा” इतिहास अठारवा संस्करण विस्तृत एकृतकाल और समीन पुनावलरनोक करता प्रस्तुत है। प्राचीन पत्थरों लेख से लेकर आधुनिक डिजिटल विमर्श तक, हर युग के साहित्यिक संग्राहों, रचनाकारों और उनके सामाजिकराज-नीतिक परिवेश का सूक्ष्मण इस विश्लेष ग्रंथ को विश बनिष्टाता है न।यी खोजें, ताजाचन आलोात्मक दृष्टिकोण और समृद्ध संदर्भ-सचूियाँ पाठक को इतिहास की जीवंत दास्तान में बाँधती हैं। विद्यार्थ,ियोंकर्ताओं शोध साहित्य औरप्रेमियों के मार्ग लिएर्श औरकदण प्रेरास्रोत यह संस्करण हिन्दी साहित्य विकास के सम्प कीूर्ण झाँकी पेश करता है।
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हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर (भाग -1) – बारू राम ठाकुर / कर्म सिंह
Original price was: Rs.500.00.Rs.400.00Current price is: Rs.400.00.Buy Nowहिमाचल की ऊचाइयों से आती उन कहियों का संग्रह, जहाँ बर्फ़ से लदे पहाड़ों के बीच बसे छोटे-छोटे गाँवों में आज भी ज्यों की त्यों बसी हुई हैं सदियों पुरानी लोकपरंपराएँ।
बारू राम ठाकुर व कर्म सिंह की लेखनी आपको ले चलती है देवभूमि घाटियों में—जहाँ मंदिरों की घंटियाँ, भांवरों कीरव और रंग-बिरंगे लोकनृत्यों की गूँज आज भी हवा में महक बिखेरती है। इस पहले भाग में जानिए कैसे हिमाचल की मिट्टी ने पालेगीतों की सहज मधुरता, पर्व-त्योहार की विविधता और स्थानीय हस्तशिल्प की बारीक।
राजाश्रयी स्थापत्य से लेकर खादी-कंगूर के कपड़ों तक, बनारसी झुमके से हिमाचलीाल तक—हर पन्ने आपको की जीवंत रूपरेखा दिखेगी। मुख्य रूप से उठते प्रश्न—इन परंपराओं ने जीवन शैली को संवारा? पर्वों ने ग्रामीण उत्सवों में कौन- रस घोले? उत्तर मिलेंगे उसन जहाँ शब्दों ने चित्रों का रूप धारण किया हो। ‘हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर (भाग-1)’ एक आत्मीय सफ़र, संस्कृति के हर रंग को उजागर करता है।
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हिमाचल प्रदेश के गावं इतिहास , सभ्यता एवं संस्कृति ( भाग -1) – राकेश कुमार शर्मा
Original price was: Rs.400.00.Rs.320.00Current price is: Rs.320.00.Buy Nowहिमाचल प्रदेश की गोद में बसी ऊची–नीची वादियाँ भूले-बिसरे किले, लुप्त लोककथाएँ और सदियों से जगे हुए रीति-रिवाज—यह किताब आपको अनुए खंडरों और रंगीन मेलों के बीच से होते हुए एक नई यात्रा पर ले जाती है। पढ़ते-पते आप जानेंगे कैसे पर्वतीय हवाओं ने यहाँ की सामाजिकावट को सँवारा किस तरह देव केशीर्वाद से उपजी मानताएँ आज भी गांवों की पहचान हैं, और कैसे लोकगीतों में बुनकर बुनी गई कहियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी जीवन की साँस बनीं। ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोक मौखिक परंपराओं भावों को एकसाथ पिरोकर, यह ग्रंथ हिमाचल के हर निर्वात को धड़कन भर उठतााता है। चाहे मिट्टी कीक या स्निग्ध पहड़ी का स्वाद—हर पन्ने बसती है एक अनछुई दुनिया, जिसे इस लेखन जीवंत कर दिया है।
इस पुस्तक में राकेश कुमार ने हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिकों की अनुई दास्तें शब्दों में पिरोई हैं—जहाँ पहाड़ों की काट और नदी-झरनों की उत्साही कलरब सदियों से अनूठ सभ्यता रची है। प्राचीन देवी-देवताओं के मंदिरों से लेकर लोकों रस पराइयों तक हर अध्याय आप देखेंगे कि कैसेसमी मेले,िवार रीति-िवाज और हस्तशिल्प बारीकियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रहीं। गांव केकरी गलियों में गूंजते लोकनृत्य, चावल-धन की खुशबू से महकता त्यौहार, बुजुर्गों की जुबानी लोककथाएँ—इन तमाम अनुभवों मिलकर हिमाचल की सांस्कृतिक तस्वीर को इतना समृद्ध बना दिया है कि हर पन्ना पढ़ हुए है, आप खुद वहां हैं। भाग-1 में छिपे ग सिद्धांत, अनकहे किस्से और ग्रामीण के सूक्ष्म पहलू नए दृष्टिकोण से सामने आते हैं। यह सिर्फ एक इलेक्शन नहीं, बल्कि एक भुलैया जैसा सफर है, जहाँ आप हिमालय की गिरती सुरताल, मिट्टी कींधी खुशबू और मानवीय आत्मा की अदम्य जुझारू शक्ति को हर लकीर महसूस।













