Description
- PUBLISHER: Devyani Publications
- Writter: राकेश कुमार शर्मा
- Language : Hindi
- Format: Hard Copy
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- Delivery: Through Indian Postal Services
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हिमाचल प्रदेश की गोद में बसी ऊची–नीची वादियाँ भूले-बिसरे किले, लुप्त लोककथाएँ और सदियों से जगे हुए रीति-रिवाज—यह किताब आपको अनुए खंडरों और रंगीन मेलों के बीच से होते हुए एक नई यात्रा पर ले जाती है। पढ़ते-पते आप जानेंगे कैसे पर्वतीय हवाओं ने यहाँ की सामाजिकावट को सँवारा किस तरह देव केशीर्वाद से उपजी मानताएँ आज भी गांवों की पहचान हैं, और कैसे लोकगीतों में बुनकर बुनी गई कहियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी जीवन की साँस बनीं। ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोक मौखिक परंपराओं भावों को एकसाथ पिरोकर, यह ग्रंथ हिमाचल के हर निर्वात को धड़कन भर उठतााता है। चाहे मिट्टी कीक या स्निग्ध पहड़ी का स्वाद—हर पन्ने बसती है एक अनछुई दुनिया, जिसे इस लेखन जीवंत कर दिया है।
इस पुस्तक में राकेश कुमार ने हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिकों की अनुई दास्तें शब्दों में पिरोई हैं—जहाँ पहाड़ों की काट और नदी-झरनों की उत्साही कलरब सदियों से अनूठ सभ्यता रची है। प्राचीन देवी-देवताओं के मंदिरों से लेकर लोकों रस पराइयों तक हर अध्याय आप देखेंगे कि कैसेसमी मेले,िवार रीति-िवाज और हस्तशिल्प बारीकियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रहीं। गांव केकरी गलियों में गूंजते लोकनृत्य, चावल-धन की खुशबू से महकता त्यौहार, बुजुर्गों की जुबानी लोककथाएँ—इन तमाम अनुभवों मिलकर हिमाचल की सांस्कृतिक तस्वीर को इतना समृद्ध बना दिया है कि हर पन्ना पढ़ हुए है, आप खुद वहां हैं। भाग-1 में छिपे ग सिद्धांत, अनकहे किस्से और ग्रामीण के सूक्ष्म पहलू नए दृष्टिकोण से सामने आते हैं। यह सिर्फ एक इलेक्शन नहीं, बल्कि एक भुलैया जैसा सफर है, जहाँ आप हिमालय की गिरती सुरताल, मिट्टी कींधी खुशबू और मानवीय आत्मा की अदम्य जुझारू शक्ति को हर लकीर महसूस।
पंचांगदिवाकर 2083 (2026–27) आपका आत्मीय मार्गदर्शक बनकर भारतीय संस्कृति और ब्रह्मांड के तालमेल में खो जाने का अवसर लाता है। प्रत्येक तिथि, नक्षत्र, योग और करण की सूक्ष्म गणना, सूर्योदय–सूर्यास्त, चंद्रोदय–चंद्रास्त और ग्रहों की चाल को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। त्यौहारों की सीधी जानकारी, व्रत-कथा एवं पारिवारिक अनुष्ठानों के मुहूर्त, ग्रह-गति के बदलते रंगों में भीषण भूल से बचाने वाली टिप्स—हर पन्ने पर जीवन के हर पहलू के लिए दिशा-निर्देश हैं। कृषि, व्यवसाय, यात्रा या व्यक्तिगत साधना—हर कार्य की शुभमुहूर्त तलाशने वालों को मिलेगा समय का सम्यक विवेचन। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक गणनाओं का संगम, जिसे हाथ में थाम कर आप हर दिन को ऊर्जावान, सफल और सामंजस्यपूर्ण बना सकते हैं।
• पंचांग और समय गणना
• तिथि, वारा, नत्र, योग, करण
• ग्रह-गोचर और राशिफल
• मुहूर्त निर्धारण (विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा आदि)
• प्रमुख त्योहार, व्रत एवं पर्व तिथियाँ
• सूर्य-चंद्र उदय-अस्त तथा ग्रह-नक्षत्र अवस्था
• संक्रांतियाँ एवं ऋतुओं का चक्र
• सूर्यग्रहण एवं चंद्रग्रहण जानकारी
श्री मार्तण्ड पंचांगम (सवंत 2083) – वर्ष 2026–27 इस पंचांग में ॠतु-परिवर्तनों से लेकर तिथि, वर्षा, योग-करण, राहु–काल, यमघंटिका तक का त्रुटिरहित विवरण मिलेगा। पारंपरिक गणना पद्धति पर आधारित ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति, मंगल, बुध, गुरु आदि ग्रहों के गोचर से जुड़े समस्त सूक्ष्म तथ्य आपके शुभ-अशुभ निर्णयों में सहारा बनेगा। प्रमुख त्योहार, उपवास, व्रत-तिथियों के साथ संवत्, मास, पक्ष की स्पष्ट व्याख्या आपको पारिवारिक आयोजनों, धार्मिक अनुष्ठानों व व्यक्तिगत मुहूर्त चयन में आत्मविश्वास देगी। पाँच पीढ़ियों से विश्वसनीय और ख्याति प्राप्त ‘श्री मार्तण्ड पंचांगम’ जीवन के हर क्षण को समयबद्ध, सार्थक और समृद्ध बनाने का मार्ग दिखाता है।
• तिथियाँ, नक्षत्र, योग,करण
• वार एवं सूर्य‐उदय/अस्त समय
• ग्रहों की गति, संक्रांतियाँ एवं गोचर
• हिंदू त्योहार एवं व्रत कार्यक्रम
• शुभ-अशुभ मुहूर्तों का विवरण
• ग्रहण (सूर्य व चंद्र) की तिथियाँ एवं समय
• पंचाङ्गीय गणना पद्धतियाँ
• धार्मिक विधि-निर्देश एवं अनुष्ठान सूचियाँ
• यात्रानियम (‘यात्रा मुहूर्त’) एवं दैनिक उपासना प्रणाली

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