सभ्यता एवं संस्कृति ( भाग -1)
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हिमाचल प्रदेश के गावं इतिहास , सभ्यता एवं संस्कृति ( भाग -1) – राकेश कुमार शर्मा
Original price was: Rs.400.00.Rs.320.00Current price is: Rs.320.00.Buy Nowहिमाचल प्रदेश की गोद में बसी ऊची–नीची वादियाँ भूले-बिसरे किले, लुप्त लोककथाएँ और सदियों से जगे हुए रीति-रिवाज—यह किताब आपको अनुए खंडरों और रंगीन मेलों के बीच से होते हुए एक नई यात्रा पर ले जाती है। पढ़ते-पते आप जानेंगे कैसे पर्वतीय हवाओं ने यहाँ की सामाजिकावट को सँवारा किस तरह देव केशीर्वाद से उपजी मानताएँ आज भी गांवों की पहचान हैं, और कैसे लोकगीतों में बुनकर बुनी गई कहियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी जीवन की साँस बनीं। ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोक मौखिक परंपराओं भावों को एकसाथ पिरोकर, यह ग्रंथ हिमाचल के हर निर्वात को धड़कन भर उठतााता है। चाहे मिट्टी कीक या स्निग्ध पहड़ी का स्वाद—हर पन्ने बसती है एक अनछुई दुनिया, जिसे इस लेखन जीवंत कर दिया है।
इस पुस्तक में राकेश कुमार ने हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिकों की अनुई दास्तें शब्दों में पिरोई हैं—जहाँ पहाड़ों की काट और नदी-झरनों की उत्साही कलरब सदियों से अनूठ सभ्यता रची है। प्राचीन देवी-देवताओं के मंदिरों से लेकर लोकों रस पराइयों तक हर अध्याय आप देखेंगे कि कैसेसमी मेले,िवार रीति-िवाज और हस्तशिल्प बारीकियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रहीं। गांव केकरी गलियों में गूंजते लोकनृत्य, चावल-धन की खुशबू से महकता त्यौहार, बुजुर्गों की जुबानी लोककथाएँ—इन तमाम अनुभवों मिलकर हिमाचल की सांस्कृतिक तस्वीर को इतना समृद्ध बना दिया है कि हर पन्ना पढ़ हुए है, आप खुद वहां हैं। भाग-1 में छिपे ग सिद्धांत, अनकहे किस्से और ग्रामीण के सूक्ष्म पहलू नए दृष्टिकोण से सामने आते हैं। यह सिर्फ एक इलेक्शन नहीं, बल्कि एक भुलैया जैसा सफर है, जहाँ आप हिमालय की गिरती सुरताल, मिट्टी कींधी खुशबू और मानवीय आत्मा की अदम्य जुझारू शक्ति को हर लकीर महसूस।



