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विवेकानंद की आत्मकथा

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समय के पन्नों में समाहित एक अद्वितीय आत्मानुभूति की यह पुस्तक, हमें स्वामी विवेकानंद के भीतर के अनछुए प्रदेशों में ले जाती है। बाल्यावस्था की सरल अभिलाषाओं से लेकर युवा मन में उठे धर्म, समाज और आत्मा के प्रश्न—हर मोड़ पर लिखा है एक सशक्त संघर्ष, जो अंततः उन्हें विश्वबन्धुत्व का प्रेरक संदेशवाहक बनाता है। कवि शंकरदास की गाथाओं से प्रभावित हो… इस आत्मकथा में पाए आपँगे:

• कोलकात्ते के गलियारों में संघर्षरत एक साधारण किशोर की जीवंत झलक

• गुरुशिष्य संबंध की गूढ़ता और उसके अनुभवजन्य रहस्य

• आध्यात्मिक अन्वेषण के कठिनों मार्ग पर उतरे विवेकानंद की असाधारण दृढ़ता

• सामाजिक परिवर्तन के लिए ज्वलंत विचार और संघर्ष की वेणी

प्रभात प्रकाशन से प्रस्तुत यह अनुवाद, स्वामी जी के शब्दों में प्रकाशित, उनके मनोभाव और व्यक्तित्व को ऐसा कैनवास देता है, जहाँ प्रत्येक पाठक को अपनी ही तलाश का आरंभिक पथ दिखता है।

Description

  • PUBLISHER: प्रभात प्रकाशन
  • Writter:  शंकर
  • Language ‏ : Hindi
  • pages: 359
  • Format:  Hard Copy
  • Seller: https://guptabookcentre.co.in/
  • Delivery: Through Indian Postal Services

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