HINDI BHASHA
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हिंदी का गद्य – साहित्य (अद्यतन संशोधन एवं परिवर्धित संस्करण )- डॉ रामचंद्र तिवारी
Original price was: Rs.1,200.00.Rs.1,020.00Current price is: Rs.1,020.00.Buy Nowगद्य-संस्कृति की संपन्नता से परिचित कराता यह अद्यतन संशोधन एवं परिवर्धित संस्करण हिन्दी साहित्य में गद्य की विविध परंपराओं, आधुनिक प्रवृत्तियों और आलोचनात्मक विमर्श का समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। कथा, निबंध, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत और समालोचना—प्रत्येक विधा की चुनिंदा रचनाएँ पाठकों को व्यापक पटल पर नए अर्थ-आयाम खोजने का अवसर देती हैं।
डॉ. रामचंद्र तिवारी के सूक्ष्म अनुसन्धान, समसामयिक संदर्भों का संयोजन और विस्तृत परिचय–टीकाएँ इस ग्रन्थ को शिक्षण, शोध तथा स्वाध्याय के लिए अनिवार्य बनाती हैं। समृद्ध उद्धरण-संग्रह, विषयानुसार सविस्तार अनुक्रमणिका और तुलनात्मक टिप्पणियाँ पारंपरिक ज्ञान को नवाचार से जोड़कर गद्य-प्रेमियों को आत्मसात करने योग्य निष्कर्ष प्रदान करती हैं।
हर अध्याय के बाद अतिरिक्त प्रश्नावली व संदर्भ-सूची पाठक को गद्य-साहित्य की गहन पड़ताल के लिए प्रेरित करती है, जबकि शेष-प्रसंगों पर उठते प्रश्न शोधार्थियों को नए मार्ग दिखलाते हैं। हिन्दी गद्य के विस्तार, विकास और संभावनाओं के यह परिपूर्ण दस्तावेज़ आपकी साहित्यिक यात्रा में अनुशेष चिन्ह बन जाएगा।
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हिंदी भाषा डॉ हरदेव बाहरी
Original price was: Rs.170.00.Rs.145.00Current price is: Rs.145.00.Buy Nowइस पुस्तक में हिंदी भाषा का समृद्ध इतिहास, सहज व्याकरण और विविध प्रयोग एक ही बुनाई में बुना गया है। आदिकालीन लोकगीतों से लेकर आधुनिक साहित्य के उर्दू-फ़ारसी-साहित्यिक रस, सब कुछ ऐसी रोचक व्याख्या में प्रस्तुत है कि पढ़ते ही शब्दों की मिठास और ताकत महसूस होती है। • व्यावहार उदाहरणिकों से समझने में सुगमता • प्राचीन शिलालेखों और समकालनीन लेख का सुंदर समनय • अभ्यास प्रश्न एवं रचनात्मक लेखन गतिविधियाँ हर अध्याय में सामने आता है हिंदी का वह रूप, जो दिल को छू लेने वाले संवाद, साहित्यिक गहराई और आत्मविश्वास से भर देता है। चाहे आप विद्यार्थी हों, शिक्षक या भाषा-प्रेमी—यह पुस्तक आपके शब्दकोश को समृद्ध करने और के भाषा रंग मूलों को आत्मसात् करने का मार्गदर्शक बनेगी।
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हिंदी भाषा का इतिहास – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.395.00.Rs.335.00Current price is: Rs.335.00.Buy Now—भोलानाथ तिवारी की यह पुस्तक हमें ले जाती है उन कालखंडों में, जब भाषा नए रूप-रंग धारण कर रही थी। शिलालेखों, सूफी काव्यों और राजकीय दस्तावेज़ों की गुत्थियों को सुलझाते हुए, लेखक ने दिखाया है कैसे विभिन्न संस्कृतियाँ, साहित्यिक आंदोलनों और सामाजिक बदलावों ने हिंदी के स्वरूप को आकार दिया। हर अध्याय में छिपे हैं रोमांचक प्रसंग: कबीर-रैदास की बिंबात्मक भाषा, रीतिकालीन रचनाओं में निहित भाव, फिर स्वतंत्रता संग्राम में उभरती जागृति की अभिवक्ति्य साथ। पढ़ हीें आधुनिक उपन्यास, नाटक और फिल्मी संवादों में हिंदी के स्वर—कैसे ये शब्दों की दुनिया को और समृद्ध बनाते हैं। व्यापक शोध पर आधारित, पर प्रवाह में बेहद सुरम्य यह इतिहास-चित्रण आपको ले जाएगा पांडुलिपियों से डिजिटल युग तक, विस्तार से दिखाता है कि भाषा कैसे समाज का आईना बनती है। विविध मानचित्र, वर्तनी-सारिणियाँ और उपादानों के साथ हर पाठक अपनी जिज्ञासा के अनुरूप नए पहलू तलाश सकेगा। एक ऐसी रिचार्जिंग खोज, जो न केवल भाषाई विद्यार्थी बल्कि सामजिक-सांस्क अनृतिकेष्वकों को भी रोमांचित कर देगी।
• विकास ऐतिहास: प्राक, अपभ्र से आधुनिक हिंदी तक
• क्षेत्रीयभाषाएँ: ब्र, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी, मगही आदि
• लिपि अवतरण: देवनागरी लिपि का उद्भव और रूपांतरण
• साहित्यिक कालक्रम: भक्ति आंदोलन, रीतिकाल, छायावाद, आधुनिक युग
• भाषाई संरचना: ध्वनिविज्ञान, शब्दरचना, व्याकरणीय परिवर्तन
• संपर्क एवं प्रभाव: संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेज़ी प्रभाव
• मानकीकरण और राष्ट्रभाषा: राजभाषा नीति, भाषा संस्थाएँ
• आधुनिक प्रसार: शिक्षा, मीडिया, डिजिटल माध्यमों में हिंदी
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हिंदी भाषा की संरचना – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.225.00.Rs.195.00Current price is: Rs.195.00.Buy Nowक्या है वह रहस्य जो हिन्दी को उसकी विशिष्ट लय और सौंदर्य देता है? “हिन्दी भाषा की संरचना” में भोलानाथ तिवारी उद्घाटित करते हैं:
• शब्दों के जन्म से लेकर वाक्यों की उड़ान तक: वर्णमाला, स्वर–व्यंजन, मान्यता–निर्धारण और शब्द-रचना का सरल, वैज्ञानिक विवेचन
• वाक्य-योजना की सभी परतें: संधि, समास, उपसर्ग–प्रत्यय, भाव–क्रिया संरचना और व्यक्तित्व की बारीकियां
• रोज़मर्रा के सवालों के व्यावहारिक समाधान: पाठ-उदाहरण, अभ्यास श्रेणियाँ और स्व-परीक्षण
• शिक्षकों, छात्रों और भाषा-प्रेमियों के लिए अमूल्य गाइड: जटिल सिद्धांतों को सहज व मार्मिक बनाता एक ऐसा संसाधन
हिन्दी की गूँज को समझने और आत्मसात करने का यह संपूर्ण मार्गदर्शक, शब्दों के परे एक संस्कृति की उपस्थिति महसूस कराता है।
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हिन्दी ( शब्द-अर्थ-प्रयोग ) – डॉ हरदेव बाहरी
Original price was: Rs.300.00.Rs.255.00Current price is: Rs.255.00.Buy Nowहिन्दी भाषा की गहराइयों में उतरने वाले हर पाठक के लिए यह पुस्तक एक अनमोल साथी बनकर उभरती है। डॉ. हरदेव बाहरी द्वारा संकलित “हिन्दी (शब्द – अर्थ – प्रयोग)” में आपको मात्र शब्दावली नहीं मिलती, बल्कि प्रत्येक शब्द के साथ इसकी कहानी, इतिहास और व्यवहारिक उदाहरणों का संगम मिलता है। प्राचीन संस्कृत से लेकर आधुनिक बोलचाल तक के शब्दों का समावेश, समानार्थी–विरुद्धार्थी शब्दों की श्रेणियाँ, वाक्य विन्यास में उनका सटीक प्रयोग—सब कुछ इस खंडबद्ध संरचना में सज्जित है।Whether you’re a student polishing your essays, a शिक्षक crafting clear lessons, या भाषाविद् linguistic tracing roots, यह ग्रंथ हर आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. आसान व्याख्याएँ, संक्षिप्त पर सटीक उदाहरण, और सामयिक शब्द चयन इसे आपकी पुस्तकालय की अनिवार्य कड़ी बनाते हैं। इस संग्रह से भाषा की शक्ति को महसूस करें, विचारों को सजीव बनाएं और शब्दों के साहचर्य में नई दक्षता पाएं
• समृद्ध हिन्दी शब्दावली
• शब्दार्थ-व्याख्या और व्युत्पत्ति
• प्रयोगिक वाक्य उदाहरण
• व्याकरणिक वर्गीकरण (लिंग, वचन, कारक इत्यादि)
• पर्यायवाची एवं विलोम शब्द
• क्षेत्रीय सां एवंस्कृतिक शब्द प्रयोग
• आधुनिक एवं पारंपरिक तकनीकी शब्दावली
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हिन्दी साहित्य का सरल इतिहास -विश्वनाथ त्रिपाठी
Original price was: Rs.275.00.Rs.240.00Current price is: Rs.240.00.Buy Nowसाहित्यिक काल विभाजन (आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक काल) • भाषा व शैली का विकास (अपभ्रंश, मध्यकालीन ब्रज–अवधी, खड़ीबोली) • प्रमुख रचनात्मक विधाएँ (काव्य, दोहा, खंडकाव्य, ग़ज़ल, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध) • भक्ति, आध्यात्मिकता व दर्शन का साहित्य पर प्रभाव • सामाजिक-धार्मिक-राजनीतिक परिवर्तनों का दायरा (सामाजिक सुधार, स्वातंत्र्य संग्राम) • साहित्यिक आन्दोलन (छायावाद, रविंद्रनाथ काल, प्रयोगवाद, अनुवाद, आधुनिकता)









