HINDI BHASHA
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सामान्य हिंदी – डॉ हरदेव बाहरी/ डॉ केदार शर्मा
Original price was: Rs.200.00.Rs.170.00Current price is: Rs.170.00.Buy Nowइस पुस्तक में हिंदी भाषा का सौंदर्य और तीव्रता दोनों समाहित हैं। डॉ. हरदेव बाहरी ने शास्त्रीय साहित्य से समकालीन बोलियों तक, हर युग की परतों शी कोशे की तरह पारदर्शी करते हुए पेश किया है। व्याकरण की कसौटी यहाँ बोझ नहीं, बल्कि संरचना की रचनात्मक कुँजी है, जो भाषा की मर्मज्ञ समझ को जीवंत बनाती है। संस्कृत-उत्पत्ति के शब्दों से लेकर अंग्रेज़ी-युगीन शब्दावलियाँ तक, हर शब्द के पीछे छिपे इतिहास और सांस्क अर्थृतिकों को आप पढ़ेंगे मान तोो भारत की विविधता एक पुस्तक के पन्नों में सिमट आई हो। लोकगीतों, कहावतों और आधुनिक लेखन के समन्वय से रचा गया यह ग्रंथ हिंदी का पुरा सफर आपके सामने एक जीवंत दस्तावेज़ की तरह प्रस्तुत करता है। विशेष अध्ययन अनुभागों में भाषा-विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सहज विस्तार से समझाया गया है, ताकि नवसीखिए भी बिना हिचक इसके रस में डूब सकें। अनुभ वहींवी अध्येताओं के लिए सूक्ष्म विश्लेषण और तुलनात्मक दृष्टिकोण नए आयाम खोलते हैं। चाहे आप शिक्षक हों, विद्यार्थी हों, लेखन-प्रेमी हों या भाष शोधाईकर्ता—डॉ. बाहरी का यह प्रलेखित यशोगान हिंदी के हर पहलू को उजागर करता है और पाठक को अपनी गहराइयों में जाने की लालसा जगाता। है
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सामान्य हिंदी ( प्रतियोगी परीक्षाओ के लिए ) – Lucent’s
Original price was: Rs.300.00.Rs.250.00Current price is: Rs.250.00.Buy NowLucent’s “सानाम्य हिंदी” आपको हिंदी भाषा का मार्गदर्शन प्रदान करता। है स्पष्ट और संक्षिप्ताक व्यरण व्याख्याएँ, रोजमर की ज़िंदगी से जुड़ी उदाहरण
-आधारित शब्दावलियाँ और प्रासिकंग अभ्यास प्रश्नों के के संग्रह साथ यह पुस्तक हर पाठ को आसानी से आत्मसात करने में मदद करती है। संकलित अध्यायों में विकल्पात्मक प्रश्न–उत्तर, हाल के परीक्षा–पैटर्न के अनुरूप मॉडल पेपर्स और सटीक संशोधन सूची हैं शामिल, ताकि आप अपने कमजोर पहलुओं की पहचान कर उन्हें मज़बूती दे सकें।स्थित व्यव प्रस्तुति और सहज भाषा प्रतियोग इसेी परीक्षाओं साथ के-साथ शैक्षणिक और आत्म-सुधार के उद्देश्य से अध्ययन करने वालों के लिए भी आदर्श बनाती है।
• महत्वपूर्ण अभ्यास-प्रश्नों और विस्तृत उत्तर–विश्लेषण से सिद्धांतो का आत्मसात
• पिछले वर्षों के प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नों संग्रह का मॉडल और पेपर् लेखन,
• सरल उदाहरण, सारांश और टिप्स के माध्यम से गति एवं सटीताक में वृद्धि
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हिंदी का गद्य – साहित्य (अद्यतन संशोधन एवं परिवर्धित संस्करण )- डॉ रामचंद्र तिवारी
Original price was: Rs.1,200.00.Rs.1,020.00Current price is: Rs.1,020.00.Buy Nowगद्य-संस्कृति की संपन्नता से परिचित कराता यह अद्यतन संशोधन एवं परिवर्धित संस्करण हिन्दी साहित्य में गद्य की विविध परंपराओं, आधुनिक प्रवृत्तियों और आलोचनात्मक विमर्श का समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। कथा, निबंध, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत और समालोचना—प्रत्येक विधा की चुनिंदा रचनाएँ पाठकों को व्यापक पटल पर नए अर्थ-आयाम खोजने का अवसर देती हैं।
डॉ. रामचंद्र तिवारी के सूक्ष्म अनुसन्धान, समसामयिक संदर्भों का संयोजन और विस्तृत परिचय–टीकाएँ इस ग्रन्थ को शिक्षण, शोध तथा स्वाध्याय के लिए अनिवार्य बनाती हैं। समृद्ध उद्धरण-संग्रह, विषयानुसार सविस्तार अनुक्रमणिका और तुलनात्मक टिप्पणियाँ पारंपरिक ज्ञान को नवाचार से जोड़कर गद्य-प्रेमियों को आत्मसात करने योग्य निष्कर्ष प्रदान करती हैं।
हर अध्याय के बाद अतिरिक्त प्रश्नावली व संदर्भ-सूची पाठक को गद्य-साहित्य की गहन पड़ताल के लिए प्रेरित करती है, जबकि शेष-प्रसंगों पर उठते प्रश्न शोधार्थियों को नए मार्ग दिखलाते हैं। हिन्दी गद्य के विस्तार, विकास और संभावनाओं के यह परिपूर्ण दस्तावेज़ आपकी साहित्यिक यात्रा में अनुशेष चिन्ह बन जाएगा।
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हिंदी भाषा डॉ हरदेव बाहरी
Original price was: Rs.170.00.Rs.145.00Current price is: Rs.145.00.Buy Nowइस पुस्तक में हिंदी भाषा का समृद्ध इतिहास, सहज व्याकरण और विविध प्रयोग एक ही बुनाई में बुना गया है। आदिकालीन लोकगीतों से लेकर आधुनिक साहित्य के उर्दू-फ़ारसी-साहित्यिक रस, सब कुछ ऐसी रोचक व्याख्या में प्रस्तुत है कि पढ़ते ही शब्दों की मिठास और ताकत महसूस होती है। • व्यावहार उदाहरणिकों से समझने में सुगमता • प्राचीन शिलालेखों और समकालनीन लेख का सुंदर समनय • अभ्यास प्रश्न एवं रचनात्मक लेखन गतिविधियाँ हर अध्याय में सामने आता है हिंदी का वह रूप, जो दिल को छू लेने वाले संवाद, साहित्यिक गहराई और आत्मविश्वास से भर देता है। चाहे आप विद्यार्थी हों, शिक्षक या भाषा-प्रेमी—यह पुस्तक आपके शब्दकोश को समृद्ध करने और के भाषा रंग मूलों को आत्मसात् करने का मार्गदर्शक बनेगी।
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हिंदी भाषा का इतिहास – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.395.00.Rs.335.00Current price is: Rs.335.00.Buy Now—भोलानाथ तिवारी की यह पुस्तक हमें ले जाती है उन कालखंडों में, जब भाषा नए रूप-रंग धारण कर रही थी। शिलालेखों, सूफी काव्यों और राजकीय दस्तावेज़ों की गुत्थियों को सुलझाते हुए, लेखक ने दिखाया है कैसे विभिन्न संस्कृतियाँ, साहित्यिक आंदोलनों और सामाजिक बदलावों ने हिंदी के स्वरूप को आकार दिया। हर अध्याय में छिपे हैं रोमांचक प्रसंग: कबीर-रैदास की बिंबात्मक भाषा, रीतिकालीन रचनाओं में निहित भाव, फिर स्वतंत्रता संग्राम में उभरती जागृति की अभिवक्ति्य साथ। पढ़ हीें आधुनिक उपन्यास, नाटक और फिल्मी संवादों में हिंदी के स्वर—कैसे ये शब्दों की दुनिया को और समृद्ध बनाते हैं। व्यापक शोध पर आधारित, पर प्रवाह में बेहद सुरम्य यह इतिहास-चित्रण आपको ले जाएगा पांडुलिपियों से डिजिटल युग तक, विस्तार से दिखाता है कि भाषा कैसे समाज का आईना बनती है। विविध मानचित्र, वर्तनी-सारिणियाँ और उपादानों के साथ हर पाठक अपनी जिज्ञासा के अनुरूप नए पहलू तलाश सकेगा। एक ऐसी रिचार्जिंग खोज, जो न केवल भाषाई विद्यार्थी बल्कि सामजिक-सांस्क अनृतिकेष्वकों को भी रोमांचित कर देगी।
• विकास ऐतिहास: प्राक, अपभ्र से आधुनिक हिंदी तक
• क्षेत्रीयभाषाएँ: ब्र, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी, मगही आदि
• लिपि अवतरण: देवनागरी लिपि का उद्भव और रूपांतरण
• साहित्यिक कालक्रम: भक्ति आंदोलन, रीतिकाल, छायावाद, आधुनिक युग
• भाषाई संरचना: ध्वनिविज्ञान, शब्दरचना, व्याकरणीय परिवर्तन
• संपर्क एवं प्रभाव: संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेज़ी प्रभाव
• मानकीकरण और राष्ट्रभाषा: राजभाषा नीति, भाषा संस्थाएँ
• आधुनिक प्रसार: शिक्षा, मीडिया, डिजिटल माध्यमों में हिंदी
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हिंदी भाषा की संरचना – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.225.00.Rs.195.00Current price is: Rs.195.00.Buy Nowक्या है वह रहस्य जो हिन्दी को उसकी विशिष्ट लय और सौंदर्य देता है? “हिन्दी भाषा की संरचना” में भोलानाथ तिवारी उद्घाटित करते हैं:
• शब्दों के जन्म से लेकर वाक्यों की उड़ान तक: वर्णमाला, स्वर–व्यंजन, मान्यता–निर्धारण और शब्द-रचना का सरल, वैज्ञानिक विवेचन
• वाक्य-योजना की सभी परतें: संधि, समास, उपसर्ग–प्रत्यय, भाव–क्रिया संरचना और व्यक्तित्व की बारीकियां
• रोज़मर्रा के सवालों के व्यावहारिक समाधान: पाठ-उदाहरण, अभ्यास श्रेणियाँ और स्व-परीक्षण
• शिक्षकों, छात्रों और भाषा-प्रेमियों के लिए अमूल्य गाइड: जटिल सिद्धांतों को सहज व मार्मिक बनाता एक ऐसा संसाधन
हिन्दी की गूँज को समझने और आत्मसात करने का यह संपूर्ण मार्गदर्शक, शब्दों के परे एक संस्कृति की उपस्थिति महसूस कराता है।
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हिन्दी ( शब्द-अर्थ-प्रयोग ) – डॉ हरदेव बाहरी
Original price was: Rs.300.00.Rs.255.00Current price is: Rs.255.00.Buy Nowहिन्दी भाषा की गहराइयों में उतरने वाले हर पाठक के लिए यह पुस्तक एक अनमोल साथी बनकर उभरती है। डॉ. हरदेव बाहरी द्वारा संकलित “हिन्दी (शब्द – अर्थ – प्रयोग)” में आपको मात्र शब्दावली नहीं मिलती, बल्कि प्रत्येक शब्द के साथ इसकी कहानी, इतिहास और व्यवहारिक उदाहरणों का संगम मिलता है। प्राचीन संस्कृत से लेकर आधुनिक बोलचाल तक के शब्दों का समावेश, समानार्थी–विरुद्धार्थी शब्दों की श्रेणियाँ, वाक्य विन्यास में उनका सटीक प्रयोग—सब कुछ इस खंडबद्ध संरचना में सज्जित है।Whether you’re a student polishing your essays, a शिक्षक crafting clear lessons, या भाषाविद् linguistic tracing roots, यह ग्रंथ हर आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. आसान व्याख्याएँ, संक्षिप्त पर सटीक उदाहरण, और सामयिक शब्द चयन इसे आपकी पुस्तकालय की अनिवार्य कड़ी बनाते हैं। इस संग्रह से भाषा की शक्ति को महसूस करें, विचारों को सजीव बनाएं और शब्दों के साहचर्य में नई दक्षता पाएं
• समृद्ध हिन्दी शब्दावली
• शब्दार्थ-व्याख्या और व्युत्पत्ति
• प्रयोगिक वाक्य उदाहरण
• व्याकरणिक वर्गीकरण (लिंग, वचन, कारक इत्यादि)
• पर्यायवाची एवं विलोम शब्द
• क्षेत्रीय सां एवंस्कृतिक शब्द प्रयोग
• आधुनिक एवं पारंपरिक तकनीकी शब्दावली
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हिन्दी साहित्य का सरल इतिहास -विश्वनाथ त्रिपाठी
Original price was: Rs.275.00.Rs.240.00Current price is: Rs.240.00.Buy Nowसाहित्यिक काल विभाजन (आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक काल) • भाषा व शैली का विकास (अपभ्रंश, मध्यकालीन ब्रज–अवधी, खड़ीबोली) • प्रमुख रचनात्मक विधाएँ (काव्य, दोहा, खंडकाव्य, ग़ज़ल, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध) • भक्ति, आध्यात्मिकता व दर्शन का साहित्य पर प्रभाव • सामाजिक-धार्मिक-राजनीतिक परिवर्तनों का दायरा (सामाजिक सुधार, स्वातंत्र्य संग्राम) • साहित्यिक आन्दोलन (छायावाद, रविंद्रनाथ काल, प्रयोगवाद, अनुवाद, आधुनिकता)
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हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर (भाग -1) – बारू राम ठाकुर / कर्म सिंह
Original price was: Rs.500.00.Rs.400.00Current price is: Rs.400.00.Buy Nowहिमाचल की ऊचाइयों से आती उन कहियों का संग्रह, जहाँ बर्फ़ से लदे पहाड़ों के बीच बसे छोटे-छोटे गाँवों में आज भी ज्यों की त्यों बसी हुई हैं सदियों पुरानी लोकपरंपराएँ।
बारू राम ठाकुर व कर्म सिंह की लेखनी आपको ले चलती है देवभूमि घाटियों में—जहाँ मंदिरों की घंटियाँ, भांवरों कीरव और रंग-बिरंगे लोकनृत्यों की गूँज आज भी हवा में महक बिखेरती है। इस पहले भाग में जानिए कैसे हिमाचल की मिट्टी ने पालेगीतों की सहज मधुरता, पर्व-त्योहार की विविधता और स्थानीय हस्तशिल्प की बारीक।
राजाश्रयी स्थापत्य से लेकर खादी-कंगूर के कपड़ों तक, बनारसी झुमके से हिमाचलीाल तक—हर पन्ने आपको की जीवंत रूपरेखा दिखेगी। मुख्य रूप से उठते प्रश्न—इन परंपराओं ने जीवन शैली को संवारा? पर्वों ने ग्रामीण उत्सवों में कौन- रस घोले? उत्तर मिलेंगे उसन जहाँ शब्दों ने चित्रों का रूप धारण किया हो। ‘हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर (भाग-1)’ एक आत्मीय सफ़र, संस्कृति के हर रंग को उजागर करता है।
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हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत – बारू राम ठाकुर / मिहिर बोराना
Original price was: Rs.400.00.Rs.320.00Current price is: Rs.320.00.Buy Now—इस में आपको मिलेगा प्रदेश की सांस्क विरासत का हर रूप-रंग। बारू राम ठाकुर और मिहिर बोराना ने मिलकर हिमाचल की लोकथाओं, मेलों-त्योहारों, वादयंत्रों और लोकृत का ऐसा समग्र दर्शनचा, जो पाठक को हर पन्ने पर न जानकारी सिर्फ देता है, बल्कि उसकी कल्पाओं को नए आयाम प्रदान करता हैचुण्डा देवी मंदिर की वृद्ध टेराकोटा मूर्तियों से लेकर मनाली के बजार में बुनकरों के ताने-बाने तक, हर अध्याय हिमाचल की विविधता का जश्न मनाता। आप सुनेंगे ग्रामीण वाद जैसेोल, बंसुरी और शहनाई की लहरी, महसूस करेंगे किच्ची व चवरी चाय मिठास औरेंगे हूणाओं की चमत्कारिक कथाएँ। इसके साथ ही हथकरघा उद्योग, धूल मिट्टी की कलाकृतियाँ और पहाड़ी व्यंजनों कीबू भी जीवंत हो उठेगी। लेखकों की सूक्ष्म अभिव्यक्ति आपको हिमाचल की वादियों में ले, जहाँ प्रत अनुभव और शोधपरक तथ्य एक साथ मिल इतिहास और लोकजीवन को नया स्वरूप देते हैं। उन पुरानी हवेलियों की खिड़कियों से झांकती परंपराएँ, पहाड़ी लोगों का जीवन-शैली और प्रकृति से उनका अनूठा रिश्ता—सब यहाँ आपके समक्ष खुले दिल से है। यदि हिमाचल की आत्मा कोना चाहते हैं, उसकीूँज से आँचल लेना चाहते हैं, तो इस पुस्तक में छुपी विरासत की हर गुंजलदार धड़कन आपके भीतर एक नई ताजगी भर देगी।
– हिमाचल प्रदेश की लोक संगीत और नृत्य परंपराएँ
– पारंपरिक शिल्प और कारीगरी – मान्यताएँ, रीति-रिवाज और तीर्थ स्थल
– स्थापत्य विरासत और ऐतिहासिक स्मारक
– मौखिक साहित्य, लोककथाएँ, कहानी सुनाना
– त्यौहार, मेले और सामुदायिक उत्सव
– स्वदेशी समुदाय और सामाजिक रीति-रिवाज
– अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत और संरक्षण प्रयास
पर्वतों की गोद में बसीाचल प्रदेश की प्राचीन परंपराएँ, लोकगीतों की अनुगूँज और देव-देवताओं की अविचल आस्था इसी अनूठी रूप में जीवंत होती दिखती है। सुनहरी धूप में चमकते मंदिरों के शंखनाद से लेकर बर्फ से ढ गाँवों में गूंजते पेण्डल केृत्य तक, हर चित्र-अलंकरण हिमाच संस्कृति के रंग और रूप की सम कहानी बयाँ करते हैं। ठ-ठगी, झड़ू और-घगरा की मर्मस्थ धुनें गुर्जर-ठाकुरों की गाएँ और लाहौल स्पीति की बौद्धासत—इन सबका सजीव दस्तावेजकरण पाठक को उस जीवंत लोकजीवन में ले जाता है जहां पर्व-ोहार, हस्तश्प और खानपान आपस में मिलकर एक अलग ही आत्मीयता रच जाते हैं। बारू राम ठाकुर व मिहिर बोराना की सूक्ष्म दृष्टि व सजीव शब्दावलीाचल की सांस्कृतिक विरासत को नित नए आयाम देती है, जैसे कोहरे से उभरता हिमालय।
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हिमाचल प्रदेश के गावं इतिहास , सभ्यता एवं संस्कृति ( भाग -1) – राकेश कुमार शर्मा
Original price was: Rs.400.00.Rs.320.00Current price is: Rs.320.00.Buy Nowहिमाचल प्रदेश की गोद में बसी ऊची–नीची वादियाँ भूले-बिसरे किले, लुप्त लोककथाएँ और सदियों से जगे हुए रीति-रिवाज—यह किताब आपको अनुए खंडरों और रंगीन मेलों के बीच से होते हुए एक नई यात्रा पर ले जाती है। पढ़ते-पते आप जानेंगे कैसे पर्वतीय हवाओं ने यहाँ की सामाजिकावट को सँवारा किस तरह देव केशीर्वाद से उपजी मानताएँ आज भी गांवों की पहचान हैं, और कैसे लोकगीतों में बुनकर बुनी गई कहियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी जीवन की साँस बनीं। ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोक मौखिक परंपराओं भावों को एकसाथ पिरोकर, यह ग्रंथ हिमाचल के हर निर्वात को धड़कन भर उठतााता है। चाहे मिट्टी कीक या स्निग्ध पहड़ी का स्वाद—हर पन्ने बसती है एक अनछुई दुनिया, जिसे इस लेखन जीवंत कर दिया है।
इस पुस्तक में राकेश कुमार ने हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिकों की अनुई दास्तें शब्दों में पिरोई हैं—जहाँ पहाड़ों की काट और नदी-झरनों की उत्साही कलरब सदियों से अनूठ सभ्यता रची है। प्राचीन देवी-देवताओं के मंदिरों से लेकर लोकों रस पराइयों तक हर अध्याय आप देखेंगे कि कैसेसमी मेले,िवार रीति-िवाज और हस्तशिल्प बारीकियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रहीं। गांव केकरी गलियों में गूंजते लोकनृत्य, चावल-धन की खुशबू से महकता त्यौहार, बुजुर्गों की जुबानी लोककथाएँ—इन तमाम अनुभवों मिलकर हिमाचल की सांस्कृतिक तस्वीर को इतना समृद्ध बना दिया है कि हर पन्ना पढ़ हुए है, आप खुद वहां हैं। भाग-1 में छिपे ग सिद्धांत, अनकहे किस्से और ग्रामीण के सूक्ष्म पहलू नए दृष्टिकोण से सामने आते हैं। यह सिर्फ एक इलेक्शन नहीं, बल्कि एक भुलैया जैसा सफर है, जहाँ आप हिमालय की गिरती सुरताल, मिट्टी कींधी खुशबू और मानवीय आत्मा की अदम्य जुझारू शक्ति को हर लकीर महसूस।














