General hindi
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Lateral Engineering Entrance Test ( LEET) – 2 in 1 Edition (Hindi English Combined)
Original price was: Rs.398.00.Rs.320.00Current price is: Rs.320.00.Buy Nowलैटरल इंजीनियरिंग एंट्रेंस टेस्ट (LEET – हिंदी में एकपूर्ण मार्गदर्शिका जहाँ हर विषय की ढेरों टिप्स, ट्रिक्स और व्यावहारिक अभ्यास एक ही मंच पर उपलब्ध हैं। इस किताब में शामिल हैं:
• सामान्य ज्ञान के नज़ीके पहलू, करंट अफेयर्स सवालों के साथ
• भौतिकी के कंसेप्ट्स को सरल उदाहरण और चित्रों के माध्यम से समझाने वाली व्याख्याएँ
• रसायन विज्ञान के पूरे सिलेबस का विस्तृत कवरेज, रिएक्शन मेकेनिज्म से लेकर प्रयोगशाला तकनीकों तक
• गणित के महत्वपूर्ण फॉर्मूले, चरणबद्ध हल के साथ अभ्यास सेट
• पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का संकलन और उनकी क्रमब समीक्षाद्ध
• समय प्रबंधन, प्रश्न-पहचान रणनीत औरियाँ आत्मविश्व बढ़ासाने वाले मॉक टेस्ट
चाहे आप शुरुआती हों या संशोधित करने वाले विद्यार्थी, यह पुस्तक हिंदी में आपके LEET की तैयारी को नए आयाम देगी—हर सवाल को आत्मविश्वास से सुलझाने के लिए तैयार करें अपना दिमाग।
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आधुनिक साहित्य की प्रवृतियाँ – नामवर सिंह
Original price was: Rs.199.00.Rs.175.00Current price is: Rs.175.00.Buy Nowनामवर सिंह की तीक्ष्ण दृष्टि और गहन चिंतन से प्रवाहित यह संकलन आधुनिक हिंदी साहित्य के विविध आयाम को उजागर करता है। छायावाद की मधुर कल्पनाओं से लेकर सामाजिक यथार्थ की कटु सच्चाई तक, प्रत्येक लेख पाठक को समय की प्रगतिशील लहरों में ले जाकर साहित्य के नए आयामों से परिचित कराता है। स्वतंत्रता-उत्तर भारतीय कविता में जन्मी पीड़ा और उत्साह, नाटकीय प्रयोगों की नई राहें, आलोचना के युवा स्वर – हर प्रवृत्ति के स्रोत, इतिहास और प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण यहाँ मिल जाएगा। करीब पाँच दशकों के आलोचनात्मक अनुभव का यह संग्रह हिंदी के उन खोजी पाठकों के लिए मार्गदर्शक बनता है, जो शब्दों के भीतर गहरे छिपी सामाजिक-दर्शनात्मक तहों को समझना चाहते हैं।
• प्रवर्तनवादी (प्रोग्रेसिव) आंदोलन
• नई कविता (आज़ाद छंद, यथार्थवाद, संश्लेषण)
• आधुनिक कहानी और उपन का विकास
• रंगमंचीय प्रयोग और आधुनिक नाटक
• प्रतीकवाद, अतियथार्थवाद, अस्तित्ववाद
• स्वतंत्रता–पूर्व और पश्चात् सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव
• संरचनावाद, मार्क्सवादी एवं उत्तरनिवासन्त्रिक आलोचना
• दलित साहित्य और स्त्रीवादी विमर्श
• भाषा, शैली एवं संस्कृतिकरण के नवाचार
• आधुनिक साहित्य के भावी रुझान
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आधुनिक हिन्दी आलोचना के बीज शब्द – बच्चन सिंह
Original price was: Rs.295.00.Rs.250.00Current price is: Rs.250.00.Buy Nowबच्चन सिंह की ‘आधुनिक हिन्दी आलोचना के बीज शब्द’ हिन्दी साहित्यिक विमर्श का एक अनूठा कोश है, जिसमें हर प्रविष्टि समकालीन आलोचना के मूलभूत सिधान्तो और तकनीकों को सजीव कर देती है। संरचना, शैली, पाठकीय प्रतिक्रिया, सांस्कृतिक संदर्भ—इन बीज शब्दों के माध्यम से पाठकों को मिलता एक है सटीकेम फ्रवर्क, जो हिंदी साहित्य की गहराइयों में उतरकर रचनात्मक विश्लेषण की नई दिशा खोलता है। साहित्य प्रेमी, यह ग्रंथ बुनियादी अवधारणाओं से लेकर जटिल त-र्कप्रणियोंाल तक की यात्रा को सहज, सशक्त और दूरामीग बनाता है।
• आधुनिक हिंदी आलोचना का इतिहास और विकास
• केंद्रीय आलोचनात्मक सिद्धांत एवं विचारधाराएँ
• महत्वपूर्ण आलोचनात्मक शब्दों की परिभाषाएँ
• साहित्यिक विधाओं (काव्य, कथा, उपन्यास, नाटक) पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण
• भाषा, रूप एवं संरचना का विश्लेषण
• समाज, संस्कृति एवं ऐतिहासिक संदर्भ में साहित्य का अध्ययन
• समकालीन आलोचकों एवं उनकी प्रवृत्तियों का अवलोकन
• आलोचना एवं सृजनशीलता के पारस्परिक संबंध
• आलोचनात्मक विधियों का अनुप्रयोग एवं सीमाएँ
• हिंदी आलोचना में नव प्रवृत्तियाँ एवं संभावनाएँ
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कविता के नए प्रतिमान – नामवर सिंह
Original price was: Rs.195.00.Rs.170.00Current price is: Rs.170.00.Buy Nowकविता के नए प्रतिमान में नामवर ने सिंह भारतीय काव्यरचना को नई दिशा दी है—यह केवल पाठ्य-पुस्तक नहीं, बल्कि सोच के आयामों का विस्तार करने वाली एक लंबी खोज है। यहां परंपरा और प्रयोग की सीमाएं धुंधली होती दिखती हैं: शास्त्रीय छंद-रचनाओं का संतुलन आधुनिक अभिव्यक्ति की उग्र लय से मिलाकर एक अनूठी काव्यधारा रची गई है।
प्रत्येक अध्याय में भाषा और भाव की सटीक तहखोली प्रस्तुत की गई है—क्योंकि कवि जब शब्दों के पार जाकर मन से जुड़ता है, तभी कविता अपना सबल प्रभाव छोड़ती है।नामवर सिंह ने देश-विदेश के विभिन्न काव्यपरिदृश्यों और आलोचनाओं का विश्लेषण कर, पाठक को यह समझने में मदद की है कि कैसे एक नई पीढ़ी ने खुद की पहचान बनाने के लिए काव्य के आयाम पुनर्परिभाषित किए।
इस पुस्तक में न सिर्फ तकनीकी पक्ष का विवेचन है, बल्कि उसकी सामाजिक-राजनीतिक जेंड़ भी उजागर की गई हैं। परिणामस्वरूप पाठक नये प्रश्न उठाते हुए अपने भीतर से बोलतीिताओं कव का अनुभव करने लगता है। साहित्याचार्यों, कवि-मित्रों और हर उस रुचिवान पाठक के लिए यह एक प्रेरक मार्गदर्शिका है, जो शब्दों के भीतर छिपी नई संभावनाओं को महसूस करना चाहता है।
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वस्तुनिष्ठ ( सामान्य हिंदी दिग्दर्शन )-ओंकार नाथ वर्मा
Original price was: Rs.280.00.Rs.235.00Current price is: Rs.235.00.Buy Nowएक ऐसी पुस्तक जो हिंदी चिंतन की गहराइयों को उजागर करते हुए आधुनिक जीवन के सवालों का सटीक उत्तर खोजती है। “उपकार वस्तुनिष्ठ” में ओंकार नाथ वर्मा ने लोक संस्कृति, पुराण-पितामहों की सूक्ष्म दृष्टि और समकालीन सामाजिक यथार्थ को जोड़ते हुए एक समष्टिगत दर्शन प्रस्तुत किया है।सरल भाषा में विवेचित इस पुस्तक में आप पाएँगे—
• वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण • उपकार सिद्धांत (भाषा उपयोग की उपयोगावादिता) • सामान्य हिंदी दिग्दर्शन (उद्देश्य एवं रूपरेखा) • हिंदी व्याकरण एवं संरचना • भाषा प्रयोग एवं अनुषंगिकता • साहित्यिक विधाएँ एवं शैलियाँ • हिंदी भाषा शिक्षण की पद्धतियाँ • भाषा का सामाजिक- सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य !
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व्याकरण भारती (हिंदी भाषा का सर्वोत्तम व्याकरण ) H.G. Publications
Original price was: Rs.280.00.Rs.240.00Current price is: Rs.240.00.Buy Nowव्याकरण भारती’ में मिलती है व्यवस्था-प्रणाली से सजग व्याकरण संरचना, जो पाठकों को सरल उदाहरणों और सुस्पष्ट व्याख्याओं के साथ ले चलती है—शुरुआत से हर अध्याय में आत्मविश्वास भरने तक। प्रत्येक टॉपिक को ठोस अभ्यासों, समकालीन संदर्भों और परीक्षणोन्मुख प्रश्नों के जरिये समझने का अवसर मिलता है। छात्र, शिक्षक, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी—सभी के लिए यह पुस्तक भाषा की जटिलताओं को सहज बनाकर आत्मसात करने में मददगार है। हिंदी व्याकरण के हर सिद्धांत को आत्मसात करना कभी इतना सुगम और रोचक नहीं रहा।
• वर्णमाला: स्वर–व्यंजन, मात्राएँ • शब्दरचना: मूलशब्द, उपसर्ग, प्रत्यय• रूप pariv: लिंग,चन, पुरुष, कारक • संधि नियम • समास के भेद • तद्धित तथा उत्पत्ति–धातु निर्माण • अलंकार एवं छंद • वाक्य रचना: पदविन्यास, अव्ययीभाव, कारक • विराम चिन्ह एवं शुद्धलेखन • हिंदी रचना: अनुच्छेद, निबंध, पत्र लेखन • अभ्यास प्रश्नावली एवं मॉडल परीक्षा प्रश्न
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सामान्य हिंदी – डॉ हरदेव बाहरी/ डॉ केदार शर्मा
Original price was: Rs.200.00.Rs.170.00Current price is: Rs.170.00.Buy Nowइस पुस्तक में हिंदी भाषा का सौंदर्य और तीव्रता दोनों समाहित हैं। डॉ. हरदेव बाहरी ने शास्त्रीय साहित्य से समकालीन बोलियों तक, हर युग की परतों शी कोशे की तरह पारदर्शी करते हुए पेश किया है। व्याकरण की कसौटी यहाँ बोझ नहीं, बल्कि संरचना की रचनात्मक कुँजी है, जो भाषा की मर्मज्ञ समझ को जीवंत बनाती है। संस्कृत-उत्पत्ति के शब्दों से लेकर अंग्रेज़ी-युगीन शब्दावलियाँ तक, हर शब्द के पीछे छिपे इतिहास और सांस्क अर्थृतिकों को आप पढ़ेंगे मान तोो भारत की विविधता एक पुस्तक के पन्नों में सिमट आई हो। लोकगीतों, कहावतों और आधुनिक लेखन के समन्वय से रचा गया यह ग्रंथ हिंदी का पुरा सफर आपके सामने एक जीवंत दस्तावेज़ की तरह प्रस्तुत करता है। विशेष अध्ययन अनुभागों में भाषा-विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सहज विस्तार से समझाया गया है, ताकि नवसीखिए भी बिना हिचक इसके रस में डूब सकें। अनुभ वहींवी अध्येताओं के लिए सूक्ष्म विश्लेषण और तुलनात्मक दृष्टिकोण नए आयाम खोलते हैं। चाहे आप शिक्षक हों, विद्यार्थी हों, लेखन-प्रेमी हों या भाष शोधाईकर्ता—डॉ. बाहरी का यह प्रलेखित यशोगान हिंदी के हर पहलू को उजागर करता है और पाठक को अपनी गहराइयों में जाने की लालसा जगाता। है
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हिंदी आलोचना (अद्यतन एवं परिवर्धित संस्करण ) – विश्वनाथ त्रिपाठी
Original price was: Rs.250.00.Rs.210.00Current price is: Rs.210.00.Buy Nowविश्वनाथ त्रिपाठी का अद्यतन एवं परिवर्धित “हिंदी आलोचना” आपको संस्कृत से लेकर समकाल प्रवीनृत्तियों तक की संपोषित विवेचना में ले जाता है। इस संस्करण में शामिल हैं:
• गौरवमय इतिहासः आरंभिक रस-वैचारिक परंपराओं से लेकर आधुनिक विमर्श तक की निरंतरता और परिवर्तन
• आलोचनात्मक विधियों का विस्तारः संरचनावाद, नवआलोचना, मैक्सवादी, नारीवादी, पोस्टकोलोनियल और पोस्टमॉडर्न दृष्टिकोण
• समृद्ध उदाहरण एवं ग्रंथपरिचर्चा: प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन और आज के प्रमुख आलोचकों की गहरी पड़ताल
• नवीन संवर्धनः डिजिटल मीडिया, फिल्म-समीक्षा, जनसंपर्क और सोशल नेटवर्क के संदर्भ में हिंदी आलोचना के नए आयाम
• सुधारित पुस्तक-सूची एवं संदर्भ सामग्री: शोधार्थियों, शिक्षकों और साहित्यिक उत्साहीों के लिए अनिवार्य मार्गदर्शन
इस संपूर्ण ग्रंथ में त्रिपाठी की स्पष्ट भाषा, सुव्यवस्थित प्रस्तुति और समसामयिक दृष्टिकोण मिलकर हिंदी आलोचना को न सिर्फ समझाने बल्कि उसे नया दृष्टिकोण देने का कार्य करते हैं। चाहे आप पाठ्यक्रम में इस विषय को अपना रहे हों, शोध कर रहे हों या साहित्य स्नेही हों—यह संस्करण आपको आलोचनात्मक पारंपरिकता से मुक्त होकर नए विचारकों के क्षितिज तक ले जाएगा।
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हिंदी भाषा का इतिहास – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.395.00.Rs.335.00Current price is: Rs.335.00.Buy Now—भोलानाथ तिवारी की यह पुस्तक हमें ले जाती है उन कालखंडों में, जब भाषा नए रूप-रंग धारण कर रही थी। शिलालेखों, सूफी काव्यों और राजकीय दस्तावेज़ों की गुत्थियों को सुलझाते हुए, लेखक ने दिखाया है कैसे विभिन्न संस्कृतियाँ, साहित्यिक आंदोलनों और सामाजिक बदलावों ने हिंदी के स्वरूप को आकार दिया। हर अध्याय में छिपे हैं रोमांचक प्रसंग: कबीर-रैदास की बिंबात्मक भाषा, रीतिकालीन रचनाओं में निहित भाव, फिर स्वतंत्रता संग्राम में उभरती जागृति की अभिवक्ति्य साथ। पढ़ हीें आधुनिक उपन्यास, नाटक और फिल्मी संवादों में हिंदी के स्वर—कैसे ये शब्दों की दुनिया को और समृद्ध बनाते हैं। व्यापक शोध पर आधारित, पर प्रवाह में बेहद सुरम्य यह इतिहास-चित्रण आपको ले जाएगा पांडुलिपियों से डिजिटल युग तक, विस्तार से दिखाता है कि भाषा कैसे समाज का आईना बनती है। विविध मानचित्र, वर्तनी-सारिणियाँ और उपादानों के साथ हर पाठक अपनी जिज्ञासा के अनुरूप नए पहलू तलाश सकेगा। एक ऐसी रिचार्जिंग खोज, जो न केवल भाषाई विद्यार्थी बल्कि सामजिक-सांस्क अनृतिकेष्वकों को भी रोमांचित कर देगी।
• विकास ऐतिहास: प्राक, अपभ्र से आधुनिक हिंदी तक
• क्षेत्रीयभाषाएँ: ब्र, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी, मगही आदि
• लिपि अवतरण: देवनागरी लिपि का उद्भव और रूपांतरण
• साहित्यिक कालक्रम: भक्ति आंदोलन, रीतिकाल, छायावाद, आधुनिक युग
• भाषाई संरचना: ध्वनिविज्ञान, शब्दरचना, व्याकरणीय परिवर्तन
• संपर्क एवं प्रभाव: संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेज़ी प्रभाव
• मानकीकरण और राष्ट्रभाषा: राजभाषा नीति, भाषा संस्थाएँ
• आधुनिक प्रसार: शिक्षा, मीडिया, डिजिटल माध्यमों में हिंदी
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हिंदी भाषा की संरचना – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.225.00.Rs.195.00Current price is: Rs.195.00.Buy Nowक्या है वह रहस्य जो हिन्दी को उसकी विशिष्ट लय और सौंदर्य देता है? “हिन्दी भाषा की संरचना” में भोलानाथ तिवारी उद्घाटित करते हैं:
• शब्दों के जन्म से लेकर वाक्यों की उड़ान तक: वर्णमाला, स्वर–व्यंजन, मान्यता–निर्धारण और शब्द-रचना का सरल, वैज्ञानिक विवेचन
• वाक्य-योजना की सभी परतें: संधि, समास, उपसर्ग–प्रत्यय, भाव–क्रिया संरचना और व्यक्तित्व की बारीकियां
• रोज़मर्रा के सवालों के व्यावहारिक समाधान: पाठ-उदाहरण, अभ्यास श्रेणियाँ और स्व-परीक्षण
• शिक्षकों, छात्रों और भाषा-प्रेमियों के लिए अमूल्य गाइड: जटिल सिद्धांतों को सहज व मार्मिक बनाता एक ऐसा संसाधन
हिन्दी की गूँज को समझने और आत्मसात करने का यह संपूर्ण मार्गदर्शक, शब्दों के परे एक संस्कृति की उपस्थिति महसूस कराता है।
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हिंदी साहित्य का आदिकाल – हजारीप्रसाद द्विवेदी
Original price was: Rs.165.00.Rs.150.00Current price is: Rs.150.00.Buy Nowहज़ारीप्रसाद द्विवेदी की तीजनी से उभरती हिंदी भाषा के पहले गीतों, गाथाओं और भक्ति-रचनाओं का यह रोमांचक सफ़र है। यहां आप सुनाए-समझाए बिना उतरेंगे उस युग में, जब कवियों ने अपनी आंतरिक अनुभूतियों को अनौपचारिक बोलियों में गढ़कर अनादि-काल के लोक-गीतों और आभासी प्रेम-सरिताओं को कलमबद्ध किया। कबीर–रैदास की सरलता से लेकर सूर–गोस्वामी की भाव-संवेदनाओं तक, हर पंक्ति में आप पाएंगे भाषा का विकास, समाज के संघर्ष और आध्यात्मिक ऊँचाईयों का संगम।
द्विवेदी की बेजोड़ भाषा-विश्लेषण और इतिहास-प्रसंग से समृद्ध यह रचना, आदिकालीन अपभ्रंश से लेकर ब्रज-भाषा की गरिमा तक ले जाती है। कठिन शब्दावली के जाल को तोड़कर हर पाठक के मन में जिज्ञासा जगाने वाला सहज प्रबोधन, गद्य-शैली में अभिव्यक्त गूढ़ सूक्ष्मताओं को भी मनोरंजक बनाकर प्रस्तुत करता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि हिंदी साहित्य ने अपने पहले रूप में कैसे सांस ली, उल्लास-क्रंदन किए और नवजीवन प्राप्त किया, तो यह मार्गदर्शक आपकी पहली मंज़िल बनकर उभरेगा।
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हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास – बच्चन सिंह
Original price was: Rs.400.00.Rs.340.00Current price is: Rs.340.00.Buy Now“हिन्दी साहित्य का दूसरा” इतिहास अठारवा संस्करण विस्तृत एकृतकाल और समीन पुनावलरनोक करता प्रस्तुत है। प्राचीन पत्थरों लेख से लेकर आधुनिक डिजिटल विमर्श तक, हर युग के साहित्यिक संग्राहों, रचनाकारों और उनके सामाजिकराज-नीतिक परिवेश का सूक्ष्मण इस विश्लेष ग्रंथ को विश बनिष्टाता है न।यी खोजें, ताजाचन आलोात्मक दृष्टिकोण और समृद्ध संदर्भ-सचूियाँ पाठक को इतिहास की जीवंत दास्तान में बाँधती हैं। विद्यार्थ,ियोंकर्ताओं शोध साहित्य औरप्रेमियों के मार्ग लिएर्श औरकदण प्रेरास्रोत यह संस्करण हिन्दी साहित्य विकास के सम्प कीूर्ण झाँकी पेश करता है।














