Description
- PUBLISHER: जैन प्रकाशन मंदिर
- Writter:डॉ केदार शर्मा /डॉ हरदेव बाहरी
- Pages: 728
- Language : Hindi
- Format: Hard Copy
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इस पुस्तक में हिंदी भाषा का सौंदर्य और तीव्रता दोनों समाहित हैं। डॉ. हरदेव बाहरी ने शास्त्रीय साहित्य से समकालीन बोलियों तक, हर युग की परतों शी कोशे की तरह पारदर्शी करते हुए पेश किया है। व्याकरण की कसौटी यहाँ बोझ नहीं, बल्कि संरचना की रचनात्मक कुँजी है, जो भाषा की मर्मज्ञ समझ को जीवंत बनाती है। संस्कृत-उत्पत्ति के शब्दों से लेकर अंग्रेज़ी-युगीन शब्दावलियाँ तक, हर शब्द के पीछे छिपे इतिहास और सांस्क अर्थृतिकों को आप पढ़ेंगे मान तोो भारत की विविधता एक पुस्तक के पन्नों में सिमट आई हो। लोकगीतों, कहावतों और आधुनिक लेखन के समन्वय से रचा गया यह ग्रंथ हिंदी का पुरा सफर आपके सामने एक जीवंत दस्तावेज़ की तरह प्रस्तुत करता है। विशेष अध्ययन अनुभागों में भाषा-विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सहज विस्तार से समझाया गया है, ताकि नवसीखिए भी बिना हिचक इसके रस में डूब सकें। अनुभ वहींवी अध्येताओं के लिए सूक्ष्म विश्लेषण और तुलनात्मक दृष्टिकोण नए आयाम खोलते हैं। चाहे आप शिक्षक हों, विद्यार्थी हों, लेखन-प्रेमी हों या भाष शोधाईकर्ता—डॉ. बाहरी का यह प्रलेखित यशोगान हिंदी के हर पहलू को उजागर करता है और पाठक को अपनी गहराइयों में जाने की लालसा जगाता। है

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