sanskrit book
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संस्कृत शास्त्र – मञ्जूषा ( संस्कृत की सभी प्रतियोगी परीक्षा के लिए उपयोगी ) – डॉ उदयशंकर झा
Original price was: Rs.460.00.Rs.390.00Current price is: Rs.390.00.Buy Nowसंस्कृत शास्त्र–मूञ्जषा डॉ उदयशंकर झा की यह संकलित रचना सभी उन प्रतियोग परीक्षाओ के लिए एक अनिवार्य साथी सिद्ध होती है, संस्कृत जहाँ विद्या का सटीक ज्ञान और आत्मविश्वास दोनों चाहिए। व्यव•स्थित अध्याय–प्रस्तुति: वर्णमाला सेाक व्यरण, शब्द-चनार से साहित्य- तक—हर विषय के सार को संक्षिप व्त रूप स्पष्ट में समझाता है।
• प्रवाहमय उदाहरण व अभ्यास: प्रत्येक सिद्धांत के पश्चात त्वरित परीक्षणृथ-पियांक, ताकि पै परीक्षाटर्न की जटिलताओं से निपटना सहज हो जाए।
• चयनित अंश व प्रश्न–उत्तर: पिछले वर्षों के परीक्षा प्रश्नों का विश्लेषण और संभावित प्रश्नों के संग्रह के साथ उत्तर कीों विवेचना।
• स्मरण-चिन्ह विधियाँ: कठिन नियमों व सूत्रों को याद रखने के लिए संक्षिप्त टिक-नोट्स व माइंड-मैप्स।
• भाषा का सजीवुट सम्प: शास्त्रीय ग्रंथों से उद्धृत मौलिक श्लोक उनकी और प्रासंगिक, जो पाठ को रोचक गहन बनाती हैं।
संस्कृत की बारीकियों को आत्मस करनेात के लिए संस्कृत शास्त्र–मञ्जूषा’-स सहज सुलभ सम्पूर्ण पाठ्य-संसाधन है, जिसे पढ़कर हर परीक्षार्थी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।
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संस्कृत साहित्य मंजूषा (डॉ दिनेश भारद्वाज ) – नवम संस्करण
Original price was: Rs.550.00.Rs.495.00Current price is: Rs.495.00.Buy Nowशास्त्री टेट परीक्षा ,शास्त्री भर्ती परीक्षा ,संस्कृत प्राध्यापक भर्ती परीक्षा ,अन्य संस्कृत भर्ती परीक्षा के लिए उपयोगी पुस्तक
• ऐतिहासिक विकास: वैदिक साहित्य से आधुनिक संस्कृत रचनाओं तक • प्रमुख ग्रंथ और युग: Ṛgveda, सामवेद, उपनिषद्, महाकाव्य (रामायण, महाभारत), पुराण • काव्य शास्त्र एवं अलंकार साहित्य: रस, अलंकार, ध्वनि सिद्धांत • नाट्य और नाट्यशास्त्र: भरतमुनि का ‘नाट्यशास्त्र’, प्राचीन नाटक • छंद और मीटर: छंदशास्त्र, मेट्रिकल संरचनाएँ • व्याकरण और भाषाशास्त्र: पाणिनि का ‘अष्टाध्यायी’, शाकरण • दार्शनिक ग्रंथ: सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदान्त • भक्ति और धार्मिक काव्य: भक्तिकालीन रचनाएँ, स्तोत्र, महाप्रभु सूरदास, तुलसीदास इत्यादि • साहित्यिक आलोचना और समीक्षा: समालोचनात्मक दृष्टिकोण, ग्रंथ परिचय • संस्कृत–हिंदी अनुवाद और व्याख्या: संकलन एवं हिंदी टिप्पणी
संस्कृत साहित्य मंजूषा में डॉ. दिनेश भरद्वाज ने वह समग्र दृश्य पेश किया है जो हमें वेदों के मंत्र-छंद से लेकर महाकाव्यों, काव्यों और नाटकों के अलौकिक सौंदर्य तक ले जाता है। प्रत्येक अध्याय में गूढ़ तत्त्वों को सहज भाषा में उजागर करते हुए, लेखक ने पाठक को भाव, रस और धारणाओं के संसार में प्रवास कराया है। ऐतिहासिक संदर्भों और भाषा-शास्त्रीय विवरणों का परिष्कृत मिश्रण इस ग्रंथ को न केवल छात्र-शोधार्थियों के लिए, बल्कि संस्कृत के सौंदर्य-सार से रु-ब-रु होने के इच्छुक सामान्य पाठकों के लिए भी एक अमूल्य निधि बनाता है। संस्कृत साहित्य की अमिट छाप, शिल्प-कौशल और दार्शनिक गहराइयों को जानने का यह अनूठा अवसर है।




