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सामान्य हिन्दी ( छठा संस्करण ) – राजपाल सिंह
Original price was: Rs.385.00.Rs.300.00Current price is: Rs.300.00.Buy Nowसामान्य हिन्दी (छठा संस्करण) – राजपाल सिंह
इस छठे संस्करण में हिन्दी भाषा की समृद्ध परंपरा और आधुनिक प्रयोग दोनों को एक सहज, स्पष्ट एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है। व्याकरण के सूक्ष्म नियमों से लेकर लेखन कौशल, वाक्य संरचना, अलंकार एवं भाषा-प्रयोग के विविध आयामों को रोचक उदाहरणों व विस्तृत अभ्यासों के माध्यम से आत्मसात् किया जा सकता है।
प्रत्येक अध्याय की शुरुआत संक्षिप्त सारांश से होती है, जिससे मूल बातें जल्दी समझ में आ जाएँ, फिर विस्तृत व्याख्या, उदाहरण, एवं विस्तृत अभ्यास प्रश्न आपको सिद्धांत को व्यवहार में उतारने में मदद करते हैं। नवीनतम परीक्षा पैटर्न का ध्यान रखते हुए Model Papers व पिछले वर्षों के प्रश्न–उत्तर संकलन ने इसे प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से भी अति उपयोगी बना दिया है।
सामान्य हिन्दी का यह संस्करण शिक्षकों के अनुभव, शोध कार्यों और विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है। चाहे आप विद्यालयी स्तर पर हों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, या भाषा-रुचि के लिए गहरे अध्ययन की इच्छा रखते हों—यह पुस्तक आपकी भाषा-कुशलता को निखारने का सर्वोत्तम मार्गदर्शक बनेगी।
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सार संग्रह – NCERT कक्षा VI-XII सहित ( 2025 Edition ) one liner – महेश कुमार बर्णवाल
Original price was: Rs.540.00.Rs.380.00Current price is: Rs.380.00.Buy Nowसार संग्रह – NCERT VI–XII (2025 संस्करण) महेश कुमार बर्णवाल विश्वसनीय विषयवार संक्षेप जो पाठ्यपुस्तकों की गहराई में झांकते हुए हर महत्वपूर्ण अवधारणा को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। दिन-भर की पढ़ाई के बाद भी समय अभाव हो, तो यह संकलन कम समय में भी आपको परीक्षात्मक दृष्टि से तैयार कर देगा।
• अद्यतन पाठ्यक्रम अनुरूप 2025 संस्करण
• प्रत्येक कक्षा और विषय के लिए स्पष्ट एवं बिंदुवार व्याख्याएं
• महत्वपूर्ण बिंदुओं, सूत्रों व परिभाषाओं का सहज स्मरण
• तेज़ रिवीजन के लिए डायग्राम, चार्ट और आवृत्ति आधारित प्रश्नों का समावेश
• परीक्षाओं में उच्च अंक सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन
जब तैयारी में रफ्तार चाहिए और समझ में गहराई, ‘सार संग्रह’ हर कक्षा के पाठ्यक्रम का अविभाज्य सहयोगी साबित होगा।उदाहरण और प्रश्नोत्तर अनुभाग से सिद्धांतों को व्यवहारिक समझ में परिवर्तित करें और तैयार रहें आत्मविश्वास के साथ मूल्यांकन के लिए। कॉन्सेप्ट क्लियरिटी के लिए आसान भाषा, रंगीन आरेखन और मस्तिष्क-मैप्स आपकी पढ़ाई को बना देंगी और भी प्रभावी। समय की कमी हो या फिर अंतिम घंटों की तैयारी, ‘सार संग्रह’ आपके साथ हर कदम पर योजना-वार मार्गदर्शन करता है।
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सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा 2026(कक्षा 6) Arihant (AISSEE)
Original price was: Rs.465.00.Rs.395.00Current price is: Rs.395.00.Buy Nowसैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा 2026 (कक्षा 6) के लिए, अरिहंत प्रकाशन की एक अध्ययन मार्गदर्शिका उपलब्ध है जो गणित, बुद्धि, अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान सहित संपूर्ण पाठ्यक्रम को कवर करती है.यह मार्गदर्शिका विशेष रूप से कक्षा 6 के उम्मीदवारों के लिए डिज़ाइन की गई है और इसमें अभ्यास एमसीक्यू, पिछले वर्षों के प्रश्न और पैटर्न-आधारित संशोधन नोट्स शामिल हैं
विश्वसनीय Arihant द्वारा प्रस्तुत यह पुस्तक सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा 2026 (कक्षा 6) की विस्तृत तैयारी के लिए संपूर्ण मार्गदर्शन देती है। गणित, सामान्य विज्ञान, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान एवं मानसिक योग्यता की प्रमुख अवधारणाएँ संक्षिप्त एवं आसान भाषा में समझाई गई हैं। प्रत्येक अध्याय के अंत में परीक्षा पैटर्न के अनुरूप अभ्यास प्रश्नों के सेट एवं विस्तृत समाधान आत्मविश्वास को मजबूती प्रदान करते हैं। पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र विश्लेषण, समय प्रबंधन की रणनीतियाँ और ट्रैक करने योग्य मॉक टेस्ट वास्तविक परीक्षा का अनुभव कराते हुए तैयारी को परिणाममुखी बनाते हैं।
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हिंदी आलोचना (अद्यतन एवं परिवर्धित संस्करण ) – विश्वनाथ त्रिपाठी
Original price was: Rs.250.00.Rs.210.00Current price is: Rs.210.00.Buy Nowविश्वनाथ त्रिपाठी का अद्यतन एवं परिवर्धित “हिंदी आलोचना” आपको संस्कृत से लेकर समकाल प्रवीनृत्तियों तक की संपोषित विवेचना में ले जाता है। इस संस्करण में शामिल हैं:
• गौरवमय इतिहासः आरंभिक रस-वैचारिक परंपराओं से लेकर आधुनिक विमर्श तक की निरंतरता और परिवर्तन
• आलोचनात्मक विधियों का विस्तारः संरचनावाद, नवआलोचना, मैक्सवादी, नारीवादी, पोस्टकोलोनियल और पोस्टमॉडर्न दृष्टिकोण
• समृद्ध उदाहरण एवं ग्रंथपरिचर्चा: प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन और आज के प्रमुख आलोचकों की गहरी पड़ताल
• नवीन संवर्धनः डिजिटल मीडिया, फिल्म-समीक्षा, जनसंपर्क और सोशल नेटवर्क के संदर्भ में हिंदी आलोचना के नए आयाम
• सुधारित पुस्तक-सूची एवं संदर्भ सामग्री: शोधार्थियों, शिक्षकों और साहित्यिक उत्साहीों के लिए अनिवार्य मार्गदर्शन
इस संपूर्ण ग्रंथ में त्रिपाठी की स्पष्ट भाषा, सुव्यवस्थित प्रस्तुति और समसामयिक दृष्टिकोण मिलकर हिंदी आलोचना को न सिर्फ समझाने बल्कि उसे नया दृष्टिकोण देने का कार्य करते हैं। चाहे आप पाठ्यक्रम में इस विषय को अपना रहे हों, शोध कर रहे हों या साहित्य स्नेही हों—यह संस्करण आपको आलोचनात्मक पारंपरिकता से मुक्त होकर नए विचारकों के क्षितिज तक ले जाएगा।
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हिंदी का गद्य – साहित्य (अद्यतन संशोधन एवं परिवर्धित संस्करण )- डॉ रामचंद्र तिवारी
Original price was: Rs.1,200.00.Rs.1,020.00Current price is: Rs.1,020.00.Buy Nowगद्य-संस्कृति की संपन्नता से परिचित कराता यह अद्यतन संशोधन एवं परिवर्धित संस्करण हिन्दी साहित्य में गद्य की विविध परंपराओं, आधुनिक प्रवृत्तियों और आलोचनात्मक विमर्श का समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। कथा, निबंध, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत और समालोचना—प्रत्येक विधा की चुनिंदा रचनाएँ पाठकों को व्यापक पटल पर नए अर्थ-आयाम खोजने का अवसर देती हैं।
डॉ. रामचंद्र तिवारी के सूक्ष्म अनुसन्धान, समसामयिक संदर्भों का संयोजन और विस्तृत परिचय–टीकाएँ इस ग्रन्थ को शिक्षण, शोध तथा स्वाध्याय के लिए अनिवार्य बनाती हैं। समृद्ध उद्धरण-संग्रह, विषयानुसार सविस्तार अनुक्रमणिका और तुलनात्मक टिप्पणियाँ पारंपरिक ज्ञान को नवाचार से जोड़कर गद्य-प्रेमियों को आत्मसात करने योग्य निष्कर्ष प्रदान करती हैं।
हर अध्याय के बाद अतिरिक्त प्रश्नावली व संदर्भ-सूची पाठक को गद्य-साहित्य की गहन पड़ताल के लिए प्रेरित करती है, जबकि शेष-प्रसंगों पर उठते प्रश्न शोधार्थियों को नए मार्ग दिखलाते हैं। हिन्दी गद्य के विस्तार, विकास और संभावनाओं के यह परिपूर्ण दस्तावेज़ आपकी साहित्यिक यात्रा में अनुशेष चिन्ह बन जाएगा।
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हिंदी भाषा डॉ हरदेव बाहरी
Original price was: Rs.170.00.Rs.145.00Current price is: Rs.145.00.Buy Nowइस पुस्तक में हिंदी भाषा का समृद्ध इतिहास, सहज व्याकरण और विविध प्रयोग एक ही बुनाई में बुना गया है। आदिकालीन लोकगीतों से लेकर आधुनिक साहित्य के उर्दू-फ़ारसी-साहित्यिक रस, सब कुछ ऐसी रोचक व्याख्या में प्रस्तुत है कि पढ़ते ही शब्दों की मिठास और ताकत महसूस होती है। • व्यावहार उदाहरणिकों से समझने में सुगमता • प्राचीन शिलालेखों और समकालनीन लेख का सुंदर समनय • अभ्यास प्रश्न एवं रचनात्मक लेखन गतिविधियाँ हर अध्याय में सामने आता है हिंदी का वह रूप, जो दिल को छू लेने वाले संवाद, साहित्यिक गहराई और आत्मविश्वास से भर देता है। चाहे आप विद्यार्थी हों, शिक्षक या भाषा-प्रेमी—यह पुस्तक आपके शब्दकोश को समृद्ध करने और के भाषा रंग मूलों को आत्मसात् करने का मार्गदर्शक बनेगी।
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हिंदी भाषा एवं साहित्य -एन टी ए (यू जी सी ) नेट /सेट /जे आर एफ (पेपर- ll) :-Pearson
Original price was: Rs.699.00.Rs.560.00Current price is: Rs.560.00.Buy Nowसमूचे पाठ्यक्रम को आत्मसात कराने के लिए रची गई यह हिंदी भाषा एवं साहित्य की पुस्तक एनटी (एजीयूसी) नेटसे/ट/जेआरएफ (पर-II की) प्रत्येक अपेक्षित कड़ी को बेजोड़ तरह से जोड़ती है प्र।ाचीन से लेकर आधुनिक युग तक साहित्यिक धारणाओं, आलोचनात्मक सिद्धांतों और भाषाविज के्ञान आयामों को स्पष्ट और सटीक प्रस्तुति के साथ उजागर किया गया है।
• विषयानुक्रम की खाका, परीक्षा पैटर्न और प्रश्नोत्तर दोनों दृष्टिकोणों पर आधारित विस्तृत मार्गदर्शन
• पहले से पूछे गए प्रश्नों का विश्लेष तथाण नए प्रतिमानों के अनुरूप समकालीन मॉडल प्रश्न
• महत्वपूर्ण कविताओं, गद्यांशों और आलोचनात्मक लेखों पर संक्षिप्त टीकाओं एवं व्याख्याओं का संकलन
• परीक्षा में प्र समयबंधन और उत्तर लेखन की कुशल तकनीकों के लिए अनुप्रयुक्त सुझाव
हर अध्याय के अंत में संकलित अभ्यास सेट आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और आपको परीक्षा-मंच पर निर्ण श्रेष्ठायक प्रदानता करते हैं। Pearson द्वारा प्रस्तुत, परीक्षा तैयारियों का यह संपूर्ण साथी आपकी सफलता की राह को दृढ़ता से आलोकित करता। है
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हिंदी भाषा का इतिहास – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.395.00.Rs.335.00Current price is: Rs.335.00.Buy Now—भोलानाथ तिवारी की यह पुस्तक हमें ले जाती है उन कालखंडों में, जब भाषा नए रूप-रंग धारण कर रही थी। शिलालेखों, सूफी काव्यों और राजकीय दस्तावेज़ों की गुत्थियों को सुलझाते हुए, लेखक ने दिखाया है कैसे विभिन्न संस्कृतियाँ, साहित्यिक आंदोलनों और सामाजिक बदलावों ने हिंदी के स्वरूप को आकार दिया। हर अध्याय में छिपे हैं रोमांचक प्रसंग: कबीर-रैदास की बिंबात्मक भाषा, रीतिकालीन रचनाओं में निहित भाव, फिर स्वतंत्रता संग्राम में उभरती जागृति की अभिवक्ति्य साथ। पढ़ हीें आधुनिक उपन्यास, नाटक और फिल्मी संवादों में हिंदी के स्वर—कैसे ये शब्दों की दुनिया को और समृद्ध बनाते हैं। व्यापक शोध पर आधारित, पर प्रवाह में बेहद सुरम्य यह इतिहास-चित्रण आपको ले जाएगा पांडुलिपियों से डिजिटल युग तक, विस्तार से दिखाता है कि भाषा कैसे समाज का आईना बनती है। विविध मानचित्र, वर्तनी-सारिणियाँ और उपादानों के साथ हर पाठक अपनी जिज्ञासा के अनुरूप नए पहलू तलाश सकेगा। एक ऐसी रिचार्जिंग खोज, जो न केवल भाषाई विद्यार्थी बल्कि सामजिक-सांस्क अनृतिकेष्वकों को भी रोमांचित कर देगी।
• विकास ऐतिहास: प्राक, अपभ्र से आधुनिक हिंदी तक
• क्षेत्रीयभाषाएँ: ब्र, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी, मगही आदि
• लिपि अवतरण: देवनागरी लिपि का उद्भव और रूपांतरण
• साहित्यिक कालक्रम: भक्ति आंदोलन, रीतिकाल, छायावाद, आधुनिक युग
• भाषाई संरचना: ध्वनिविज्ञान, शब्दरचना, व्याकरणीय परिवर्तन
• संपर्क एवं प्रभाव: संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेज़ी प्रभाव
• मानकीकरण और राष्ट्रभाषा: राजभाषा नीति, भाषा संस्थाएँ
• आधुनिक प्रसार: शिक्षा, मीडिया, डिजिटल माध्यमों में हिंदी
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हिंदी भाषा की संरचना – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.225.00.Rs.195.00Current price is: Rs.195.00.Buy Nowक्या है वह रहस्य जो हिन्दी को उसकी विशिष्ट लय और सौंदर्य देता है? “हिन्दी भाषा की संरचना” में भोलानाथ तिवारी उद्घाटित करते हैं:
• शब्दों के जन्म से लेकर वाक्यों की उड़ान तक: वर्णमाला, स्वर–व्यंजन, मान्यता–निर्धारण और शब्द-रचना का सरल, वैज्ञानिक विवेचन
• वाक्य-योजना की सभी परतें: संधि, समास, उपसर्ग–प्रत्यय, भाव–क्रिया संरचना और व्यक्तित्व की बारीकियां
• रोज़मर्रा के सवालों के व्यावहारिक समाधान: पाठ-उदाहरण, अभ्यास श्रेणियाँ और स्व-परीक्षण
• शिक्षकों, छात्रों और भाषा-प्रेमियों के लिए अमूल्य गाइड: जटिल सिद्धांतों को सहज व मार्मिक बनाता एक ऐसा संसाधन
हिन्दी की गूँज को समझने और आत्मसात करने का यह संपूर्ण मार्गदर्शक, शब्दों के परे एक संस्कृति की उपस्थिति महसूस कराता है।
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हिंदी साहित्य -एन.टी.ए. /यू.जी.सी. नेट / जे.आर.एफ.(प्रशनपत्र – ll) 5वां संस्करण -दृष्टि
Original price was: Rs.799.00.Rs.700.00Current price is: Rs.700.00.Buy Nowआधुनिक परीक्षा परिचय को ध्यान में रखकर तैयार यह पाँचवा संस्करण आपको हिंदी साहित्य के समग्र आयामों में सशक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्राचीन और मध्यकालीन साहित्य से लेकर आधुनिक आंदोलनों, प्रमुख रचनाकारों एवं उनके साहित्यिक संदर्भों तक—हर विषय विस्तारपूर्वक, संक्षिप्त तालिकाओं व दृष्टांतों के साथ प्रस्तुत है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण, विषयवार मूल प्रश्न–उत्तर तथा आत्ममूल्यांकन खण्ड आपकी तैयारियों को नई दिशा देंगे। स्पष्ट व्याख्याएँ, मनोवैज्ञानिक रूप से रची गई स्वयं–परीक्षण पेनल और तत्काल उपयोगी मापदण्ड इस पुस्तक को NET/JRF (प्रश्नपत्र II) के लिए अनिवार्य साथी बनाते हैं। एक ऐसे मार्गदर्शक की तरह, जो कठिन प्रश्नों के पर्दे खोलकर आपको भरोसे के साथ अट्टहास से प्रश्नावली में उतरने का आत्मविश्वास देता है।
विकासवादी हिंदी साहित्य: आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक समस एवंामयिक काल • प्रमुख साहित्यिक आंदोलन: छायावाद, द्विवेदी युग, प्रयोगवाद, नई कविता, नई कहानी, दलित एवं नारीवादी साहित्य
• काव्यशास्त्र एवं रीतिशास्त्र: अलंकार, रस, ध्वनि, छंद
• साहित्यमार्गदर्शन एवं आलोचना: साहित्यिक सिद्धांत (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष), आलोचनात्मक दृष्टिकोण
• विविध साहित्यिक विधाएँ: कविता, उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, आत्मकथा
• प्रमुख लेखक और रचनाएँ: कबीर, तुलसीदास, रहीम, प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद नाग,ार्जुन इत्यादि
• आधुनिक एवं समकालीन प्रवृत्तियाँ: सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श, आधुनिकता की चुनौतियाँ
• हिंदी भाषा एवं व्याकरण: संरचना, रूप-विचार, भाषा विकास
• शोध-पद्धति एवं परीक्षा-उन्मुख अभ्यास: प्रश्नपत्तर विश्लेषण, पिछले वर्षों के प्रश्न एवं समाधान
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हिंदी साहित्य का आदिकाल – हजारीप्रसाद द्विवेदी
Original price was: Rs.165.00.Rs.150.00Current price is: Rs.150.00.Buy Nowहज़ारीप्रसाद द्विवेदी की तीजनी से उभरती हिंदी भाषा के पहले गीतों, गाथाओं और भक्ति-रचनाओं का यह रोमांचक सफ़र है। यहां आप सुनाए-समझाए बिना उतरेंगे उस युग में, जब कवियों ने अपनी आंतरिक अनुभूतियों को अनौपचारिक बोलियों में गढ़कर अनादि-काल के लोक-गीतों और आभासी प्रेम-सरिताओं को कलमबद्ध किया। कबीर–रैदास की सरलता से लेकर सूर–गोस्वामी की भाव-संवेदनाओं तक, हर पंक्ति में आप पाएंगे भाषा का विकास, समाज के संघर्ष और आध्यात्मिक ऊँचाईयों का संगम।
द्विवेदी की बेजोड़ भाषा-विश्लेषण और इतिहास-प्रसंग से समृद्ध यह रचना, आदिकालीन अपभ्रंश से लेकर ब्रज-भाषा की गरिमा तक ले जाती है। कठिन शब्दावली के जाल को तोड़कर हर पाठक के मन में जिज्ञासा जगाने वाला सहज प्रबोधन, गद्य-शैली में अभिव्यक्त गूढ़ सूक्ष्मताओं को भी मनोरंजक बनाकर प्रस्तुत करता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि हिंदी साहित्य ने अपने पहले रूप में कैसे सांस ली, उल्लास-क्रंदन किए और नवजीवन प्राप्त किया, तो यह मार्गदर्शक आपकी पहली मंज़िल बनकर उभरेगा।














