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हिंदी भाषा एवं साहित्य -एन टी ए (यू जी सी ) नेट /सेट /जे आर एफ (पेपर- ll) :-Pearson
Original price was: Rs.699.00.Rs.560.00Current price is: Rs.560.00.Buy Nowसमूचे पाठ्यक्रम को आत्मसात कराने के लिए रची गई यह हिंदी भाषा एवं साहित्य की पुस्तक एनटी (एजीयूसी) नेटसे/ट/जेआरएफ (पर-II की) प्रत्येक अपेक्षित कड़ी को बेजोड़ तरह से जोड़ती है प्र।ाचीन से लेकर आधुनिक युग तक साहित्यिक धारणाओं, आलोचनात्मक सिद्धांतों और भाषाविज के्ञान आयामों को स्पष्ट और सटीक प्रस्तुति के साथ उजागर किया गया है।
• विषयानुक्रम की खाका, परीक्षा पैटर्न और प्रश्नोत्तर दोनों दृष्टिकोणों पर आधारित विस्तृत मार्गदर्शन
• पहले से पूछे गए प्रश्नों का विश्लेष तथाण नए प्रतिमानों के अनुरूप समकालीन मॉडल प्रश्न
• महत्वपूर्ण कविताओं, गद्यांशों और आलोचनात्मक लेखों पर संक्षिप्त टीकाओं एवं व्याख्याओं का संकलन
• परीक्षा में प्र समयबंधन और उत्तर लेखन की कुशल तकनीकों के लिए अनुप्रयुक्त सुझाव
हर अध्याय के अंत में संकलित अभ्यास सेट आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और आपको परीक्षा-मंच पर निर्ण श्रेष्ठायक प्रदानता करते हैं। Pearson द्वारा प्रस्तुत, परीक्षा तैयारियों का यह संपूर्ण साथी आपकी सफलता की राह को दृढ़ता से आलोकित करता। है
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हिंदी भाषा का इतिहास – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.395.00.Rs.335.00Current price is: Rs.335.00.Buy Now—भोलानाथ तिवारी की यह पुस्तक हमें ले जाती है उन कालखंडों में, जब भाषा नए रूप-रंग धारण कर रही थी। शिलालेखों, सूफी काव्यों और राजकीय दस्तावेज़ों की गुत्थियों को सुलझाते हुए, लेखक ने दिखाया है कैसे विभिन्न संस्कृतियाँ, साहित्यिक आंदोलनों और सामाजिक बदलावों ने हिंदी के स्वरूप को आकार दिया। हर अध्याय में छिपे हैं रोमांचक प्रसंग: कबीर-रैदास की बिंबात्मक भाषा, रीतिकालीन रचनाओं में निहित भाव, फिर स्वतंत्रता संग्राम में उभरती जागृति की अभिवक्ति्य साथ। पढ़ हीें आधुनिक उपन्यास, नाटक और फिल्मी संवादों में हिंदी के स्वर—कैसे ये शब्दों की दुनिया को और समृद्ध बनाते हैं। व्यापक शोध पर आधारित, पर प्रवाह में बेहद सुरम्य यह इतिहास-चित्रण आपको ले जाएगा पांडुलिपियों से डिजिटल युग तक, विस्तार से दिखाता है कि भाषा कैसे समाज का आईना बनती है। विविध मानचित्र, वर्तनी-सारिणियाँ और उपादानों के साथ हर पाठक अपनी जिज्ञासा के अनुरूप नए पहलू तलाश सकेगा। एक ऐसी रिचार्जिंग खोज, जो न केवल भाषाई विद्यार्थी बल्कि सामजिक-सांस्क अनृतिकेष्वकों को भी रोमांचित कर देगी।
• विकास ऐतिहास: प्राक, अपभ्र से आधुनिक हिंदी तक
• क्षेत्रीयभाषाएँ: ब्र, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी, मगही आदि
• लिपि अवतरण: देवनागरी लिपि का उद्भव और रूपांतरण
• साहित्यिक कालक्रम: भक्ति आंदोलन, रीतिकाल, छायावाद, आधुनिक युग
• भाषाई संरचना: ध्वनिविज्ञान, शब्दरचना, व्याकरणीय परिवर्तन
• संपर्क एवं प्रभाव: संस्कृत, फारसी, अरबी, अंग्रेज़ी प्रभाव
• मानकीकरण और राष्ट्रभाषा: राजभाषा नीति, भाषा संस्थाएँ
• आधुनिक प्रसार: शिक्षा, मीडिया, डिजिटल माध्यमों में हिंदी
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हिंदी भाषा की संरचना – भोलानाथ तिवारी
Original price was: Rs.225.00.Rs.195.00Current price is: Rs.195.00.Buy Nowक्या है वह रहस्य जो हिन्दी को उसकी विशिष्ट लय और सौंदर्य देता है? “हिन्दी भाषा की संरचना” में भोलानाथ तिवारी उद्घाटित करते हैं:
• शब्दों के जन्म से लेकर वाक्यों की उड़ान तक: वर्णमाला, स्वर–व्यंजन, मान्यता–निर्धारण और शब्द-रचना का सरल, वैज्ञानिक विवेचन
• वाक्य-योजना की सभी परतें: संधि, समास, उपसर्ग–प्रत्यय, भाव–क्रिया संरचना और व्यक्तित्व की बारीकियां
• रोज़मर्रा के सवालों के व्यावहारिक समाधान: पाठ-उदाहरण, अभ्यास श्रेणियाँ और स्व-परीक्षण
• शिक्षकों, छात्रों और भाषा-प्रेमियों के लिए अमूल्य गाइड: जटिल सिद्धांतों को सहज व मार्मिक बनाता एक ऐसा संसाधन
हिन्दी की गूँज को समझने और आत्मसात करने का यह संपूर्ण मार्गदर्शक, शब्दों के परे एक संस्कृति की उपस्थिति महसूस कराता है।
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हिंदी साहित्य -एन.टी.ए. /यू.जी.सी. नेट / जे.आर.एफ.(प्रशनपत्र – ll) 5वां संस्करण -दृष्टि
Original price was: Rs.799.00.Rs.700.00Current price is: Rs.700.00.Buy Nowआधुनिक परीक्षा परिचय को ध्यान में रखकर तैयार यह पाँचवा संस्करण आपको हिंदी साहित्य के समग्र आयामों में सशक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्राचीन और मध्यकालीन साहित्य से लेकर आधुनिक आंदोलनों, प्रमुख रचनाकारों एवं उनके साहित्यिक संदर्भों तक—हर विषय विस्तारपूर्वक, संक्षिप्त तालिकाओं व दृष्टांतों के साथ प्रस्तुत है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण, विषयवार मूल प्रश्न–उत्तर तथा आत्ममूल्यांकन खण्ड आपकी तैयारियों को नई दिशा देंगे। स्पष्ट व्याख्याएँ, मनोवैज्ञानिक रूप से रची गई स्वयं–परीक्षण पेनल और तत्काल उपयोगी मापदण्ड इस पुस्तक को NET/JRF (प्रश्नपत्र II) के लिए अनिवार्य साथी बनाते हैं। एक ऐसे मार्गदर्शक की तरह, जो कठिन प्रश्नों के पर्दे खोलकर आपको भरोसे के साथ अट्टहास से प्रश्नावली में उतरने का आत्मविश्वास देता है।
विकासवादी हिंदी साहित्य: आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक समस एवंामयिक काल • प्रमुख साहित्यिक आंदोलन: छायावाद, द्विवेदी युग, प्रयोगवाद, नई कविता, नई कहानी, दलित एवं नारीवादी साहित्य
• काव्यशास्त्र एवं रीतिशास्त्र: अलंकार, रस, ध्वनि, छंद
• साहित्यमार्गदर्शन एवं आलोचना: साहित्यिक सिद्धांत (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष), आलोचनात्मक दृष्टिकोण
• विविध साहित्यिक विधाएँ: कविता, उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, आत्मकथा
• प्रमुख लेखक और रचनाएँ: कबीर, तुलसीदास, रहीम, प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद नाग,ार्जुन इत्यादि
• आधुनिक एवं समकालीन प्रवृत्तियाँ: सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श, आधुनिकता की चुनौतियाँ
• हिंदी भाषा एवं व्याकरण: संरचना, रूप-विचार, भाषा विकास
• शोध-पद्धति एवं परीक्षा-उन्मुख अभ्यास: प्रश्नपत्तर विश्लेषण, पिछले वर्षों के प्रश्न एवं समाधान
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हिंदी साहित्य का आदिकाल – हजारीप्रसाद द्विवेदी
Original price was: Rs.165.00.Rs.150.00Current price is: Rs.150.00.Buy Nowहज़ारीप्रसाद द्विवेदी की तीजनी से उभरती हिंदी भाषा के पहले गीतों, गाथाओं और भक्ति-रचनाओं का यह रोमांचक सफ़र है। यहां आप सुनाए-समझाए बिना उतरेंगे उस युग में, जब कवियों ने अपनी आंतरिक अनुभूतियों को अनौपचारिक बोलियों में गढ़कर अनादि-काल के लोक-गीतों और आभासी प्रेम-सरिताओं को कलमबद्ध किया। कबीर–रैदास की सरलता से लेकर सूर–गोस्वामी की भाव-संवेदनाओं तक, हर पंक्ति में आप पाएंगे भाषा का विकास, समाज के संघर्ष और आध्यात्मिक ऊँचाईयों का संगम।
द्विवेदी की बेजोड़ भाषा-विश्लेषण और इतिहास-प्रसंग से समृद्ध यह रचना, आदिकालीन अपभ्रंश से लेकर ब्रज-भाषा की गरिमा तक ले जाती है। कठिन शब्दावली के जाल को तोड़कर हर पाठक के मन में जिज्ञासा जगाने वाला सहज प्रबोधन, गद्य-शैली में अभिव्यक्त गूढ़ सूक्ष्मताओं को भी मनोरंजक बनाकर प्रस्तुत करता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि हिंदी साहित्य ने अपने पहले रूप में कैसे सांस ली, उल्लास-क्रंदन किए और नवजीवन प्राप्त किया, तो यह मार्गदर्शक आपकी पहली मंज़िल बनकर उभरेगा।
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हिंदी साहित्य का इतिहास ( आचार्य रामचंद्र शुक्ल )
Original price was: Rs.225.00.Rs.200.00Current price is: Rs.200.00.Buy Now• भाषा विकास: अपभ्रंश से ब्रज-अवधी और खड़ीबोली तक • प्राचीन साहित्य: वैदिक, ब्राह्मण, लोक-परंपराएँ • भक्तिकालीन काव्य: निर्गुण-सगुण आंदोलन, संतपरम्परा • रीतिकालीन काव्य: काव्यशास्त्र, रसाश्रयित शैली • सूफ़ी और आध्यात्मिक साहित्य • छायावाद: भावभीनी कविता • राष्ट्रवादी साहित्य: स्वतंत्रता संग्राम का प्रभाव • आधुनिकता: नई कविता, नई कहानी, निबन्ध, आलोचना • उपन्यास और नाटक • सामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक परिवेश का चित्रण
आचार्य रामचंद्र शुक्ल की ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ उस विराटस्कृतिक यात्रा का प्रामाण दस्तावेज़ जिसने सदियों में भाषा, शैली और चेतना के नए आयाम खोल दिए। यहां प्राचीन काव्य–दंतकथाओं से लेकर मध्यकालीन भक्ति–बिम्बों, रीतिकालीन अलंकारों और आधुनिक विचारों की धारा तक, हर युग का सजीव आभास मिलता है। नमदेव–कबीर की उद्घाटित सादगी, तुलसीदास–सूरदास की मीठी मौलिकता, बिहारी–रहीम की शिल्पबद्ध काव्यकला और प्रेमचंद–महादेवी वर्मा के भीतर छुपी मानवता—इन सबकी चर्चा में आचार्य शुक्ल ने सामाजिक, धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों को बुनकर एक समग्र दृष्टि प्रस्तुत की है। हर अध्याय एक नए परिदृश्य में पाठक को ले जाता, जहां भाषा के विकास के साथ-साथ समाज की बदलती तस्वीर भी उभरकर सामने आती है। आलोचनात्मक दृष्टि, सूक्ष्म विश्लेषण और सरल शैली का संगम इसे न केवल विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य पाठ्यपुस्तक बनाता है, बल्कि उन सभी के लिए भी एक अमूल्य मार्गदर्शिका है जो हिन्दी साहित्य के गौरव और उसकी आत्मा को महसूस करना चाहते हैं।
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हिंदी साहित्य का इतिहास – डॉ. नगेन्द्र
Original price was: Rs.450.00.Rs.400.00Current price is: Rs.400.00.Buy Nowप्राचीन आख्यानों से आधुनिक कविता-युग तक, हिंदी साहित्य का इतिहास एक रंग-बिरंगी यात्रा है जहाँ शब्दों ने समाज के हर आईने को संजोया है। इस पुस्तक में आपको मिलेगी तुलसीदास के “रामचरितमानस” की आत्मीयता, सूरदास की भावपूर्ण भक्ति, मेघदूत की व्याकुलता, प्रेमचंद की जीवंत कहानियों का मानवीय चित्रण और फैज़ के शेरों में समाई क्रांति की अनुभूति। हर युग के सामाजिक-राजनीतिक बदलते परिदृश्य में साहित्य ने कैसे अपनी धार खोली, भावों को कैसे नई परिभाषाएँ दीं और पाठकों के दिलों को छुआ, इस ग्रंथ में सजीव अन्दाज़ से उकेरा गया है। विस्तृत विश्लेषण, समृद्ध संदर्भ और मनोरम उद्धरण इस पुस्तक को उन सभी पाठकों के लिए अनिवार्य बनाते हैं जो हिंदी साहित्य की प्रगाढ़ता, विविधता और सृजनात्मक ऊर्जा को करीब से जानना चाहते हैं।
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हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास – बच्चन सिंह
Original price was: Rs.400.00.Rs.340.00Current price is: Rs.340.00.Buy Now“हिन्दी साहित्य का दूसरा” इतिहास अठारवा संस्करण विस्तृत एकृतकाल और समीन पुनावलरनोक करता प्रस्तुत है। प्राचीन पत्थरों लेख से लेकर आधुनिक डिजिटल विमर्श तक, हर युग के साहित्यिक संग्राहों, रचनाकारों और उनके सामाजिकराज-नीतिक परिवेश का सूक्ष्मण इस विश्लेष ग्रंथ को विश बनिष्टाता है न।यी खोजें, ताजाचन आलोात्मक दृष्टिकोण और समृद्ध संदर्भ-सचूियाँ पाठक को इतिहास की जीवंत दास्तान में बाँधती हैं। विद्यार्थ,ियोंकर्ताओं शोध साहित्य औरप्रेमियों के मार्ग लिएर्श औरकदण प्रेरास्रोत यह संस्करण हिन्दी साहित्य विकास के सम्प कीूर्ण झाँकी पेश करता है।
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हिंदी साहित्य की भूमिका – हजारीप्रसाद द्विवेदी
Original price was: Rs.250.00.Rs.219.00Current price is: Rs.219.00.Buy Nowहज़ारीप्रसाद द्विवेदी की सूक्ष्म दृष्टि, तथ्यात्मक गहराई और सरल भाषा मिलकर हिंदी साहित्य के विविध कालों—सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई परिवर्तनों के बीच—एक समृद्ध यात्रा का अनुभव कराते हैं। प्रत्येक अध्याय में वे कवियों, कथा-संकलकों और आलोचकों को जीवंत करते हुए उस युग की संवेदनाओं और संघर्षों को फिर से उकेरते हैं। क्लासिक रचनाओं से लेकर लोकधारा की कहानियों और नाटकों तक, लेखन की प्रवृत्तियों में आए उतार-चढ़ाव की विवेचना करते समय द्विवेदीजी कािको दृष्टण सुकुमार और बोधगम्य दोनों है। नई पीढ़ी के पाठकों के लिए भी यह परिचय-पुस्तिका सहज-सुलभ है, वहीं विद्वानों को इसकी शोधपूर्ण टिप्पणियाँ और तुलनात्मक अध्ययन भी आकर्षित करेंगे। हिंदी साहित्य की इस बेजोड़ भूमिका में गहराई से उतरकर आप पाएँगे कि कैसे शब्दों ने समाज को प्रतिबिंबित किया, उसकी चेतना को आकार दिया और अंततः हमारी सांस्कृतिक धरोहर को अमर किया।
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हिन्दी ( शब्द-अर्थ-प्रयोग ) – डॉ हरदेव बाहरी
Original price was: Rs.300.00.Rs.255.00Current price is: Rs.255.00.Buy Nowहिन्दी भाषा की गहराइयों में उतरने वाले हर पाठक के लिए यह पुस्तक एक अनमोल साथी बनकर उभरती है। डॉ. हरदेव बाहरी द्वारा संकलित “हिन्दी (शब्द – अर्थ – प्रयोग)” में आपको मात्र शब्दावली नहीं मिलती, बल्कि प्रत्येक शब्द के साथ इसकी कहानी, इतिहास और व्यवहारिक उदाहरणों का संगम मिलता है। प्राचीन संस्कृत से लेकर आधुनिक बोलचाल तक के शब्दों का समावेश, समानार्थी–विरुद्धार्थी शब्दों की श्रेणियाँ, वाक्य विन्यास में उनका सटीक प्रयोग—सब कुछ इस खंडबद्ध संरचना में सज्जित है।Whether you’re a student polishing your essays, a शिक्षक crafting clear lessons, या भाषाविद् linguistic tracing roots, यह ग्रंथ हर आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. आसान व्याख्याएँ, संक्षिप्त पर सटीक उदाहरण, और सामयिक शब्द चयन इसे आपकी पुस्तकालय की अनिवार्य कड़ी बनाते हैं। इस संग्रह से भाषा की शक्ति को महसूस करें, विचारों को सजीव बनाएं और शब्दों के साहचर्य में नई दक्षता पाएं
• समृद्ध हिन्दी शब्दावली
• शब्दार्थ-व्याख्या और व्युत्पत्ति
• प्रयोगिक वाक्य उदाहरण
• व्याकरणिक वर्गीकरण (लिंग, वचन, कारक इत्यादि)
• पर्यायवाची एवं विलोम शब्द
• क्षेत्रीय सां एवंस्कृतिक शब्द प्रयोग
• आधुनिक एवं पारंपरिक तकनीकी शब्दावली
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हिन्दी व्याकरण – कामताप्रसाद गुरु
Original price was: Rs.395.00.Rs.350.00Current price is: Rs.350.00.Buy Nowशुद्ध, सुस्पष्ट और प्रभावी हिंदी लेखन के गुणों से भरपूर यह ग्रंथ कामताप्रसाद गुरु की सशक्त व्याकरण-यात्रा है। जटिल नियमों को सरल उदाहरणों के सहारे समझाने वाली भाषा, व्यापक अभ्यास-अभ्यासिका और रोज़मर्रा की बोलचाल से जुड़े पहेलियाँ आपकी व्याकरण सुदृढ़ता को सुनिश्चित करेंगी। चाहे आप विद्यार्थी हों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों या भाषा-प्रेमी यह, पुस्तक शब्द-संपदा, वाक्य-रचना और रचनात्मकता के नए द्वार खोल देगी। हिंदी की आत्मा को पहचानने और आत्मसात् करने का अटूट साथी।
• वर्णाला (स्वर व्यंजन), मात्राएँ
• शब्द-निर्माण (उपसर्ग, प्रत्यय), धातु-
• समास
• शब्द-भेद (नाम, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण, क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक)
• विभक्ति, कारक
• लिंग, वचन, पुरुष, काल
• वाक्य भेद (सरल, यौगिक, मिश्रित)
• विराम चिह्न,
• अलंकार (उपमा, अनुप्रास इत्यादि)
• अनुच्छेद, निबंध, पत्र, संवाद लेखन














