Description
- PUBLISHER: Kitab Mahal
- Writter: Dr.Bholanath Tiwari
- Pages: 550
- Language : Hindi
- Format: Hard Copy
- Seller: https://guptabookcentre.co.in/
- Delivery: Through Indian Postal Services
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विदेशो के सौंदर्य से लेकर व रचनााक्य की गहराई तक, यह पुस्तक भाषा को एक जीवित तर्क–ंत्रत के रूप में पेश करती है। डॉ. भोलानाथ तिवारी ने उदाहरण सरलों, समृद्ध ऐतिहासिक संदर्भों और समॉलोकन के माध्यम से है बताया कि कैसे ध्वनि, व्याक और अर्थ का विलय हमें अपनी सोच, संस्कृति और पहचान से जोड़ता है। किस तरह लिपियाँ बनती, हैं बोल बीच के अंतऱसंवाद कैसे फलता-फूलता है, या भाषा का चहुँओर विस्तार सामाजिक बदलावों पर कै प्रभावसा डालता— है इन सभी सवालों के जवाब रोचक प्रयोग भाषाों और नवीनतम शोध से सक्षम तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। भारतीय संदर्भ में विविध भाषाई संरचनाओं की पड़ताल से लेकर वैश्विक भाषाई प्रवृतियों तक, यह ग्रंथ विद्यार्थी, अध्यापक और भाषा-विषयक किसी भी जिज्ञासु पाठक के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक साबित होगा Dr।. तिवारी की स्पष्ट शैली और जीवंत व्याख्याएँ आपको भाषा की मौलिकता में और उसके अद्भुतुओं पहल से अवगत होने अवसर का देंगी।

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